नई दिल्ली। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में चल रहे सीमा तनाव को खत्म करने के लिए बातचीत का दौर जारी है। इस बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बुधवार को कहा कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विवादित क्षेत्रों में सेना की दो और डिविजन तैनात कर दी हैं। चीन अपनी विस्तारवादी नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है। यह स्थिति तब है जब दक्षिण शिनजियांग के सैन्य प्रमुख मेजर-जनरल लियु लिन ने लेह-स्थित 14 कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह के साथ हुई बातचीत में गलवान घाटी से अपने सैनिकों को हटाने पर सहमति व्यक्त की थी।
सूत्रों ने कहा, कुल मिलाकर पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन ने लगभग 24,000 सैनिकों को तैनात कर रखा है। सूत्रों ने कहा कि चीनी सेना ने सीमा पर टकराव की स्थिति को बढ़ाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारी तोप, टैंक और लड़ाकू विमान भी तैनात कर रखे हैं। तिब्बत क्षेत्र में चीन आमतौर पर सेना की डिविजन को तैनात करता है। लेकिन अब उसने दो और डिविजन तैनात किए हैं। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि वे टकराव रोकने के लिए किसी सर्वसम्मति के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीनी मंसूबों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
भारत- चीन के बीच 12 घंटे तक बातचीत चली, मगर नहीं निकला कोई नतीजा
पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को हल करने के लिए भारत और चीनी सैन्य अधिकारियों के बीच 12 घंटे तक बातचीत चली। सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी। सुबह 10.30 बजे शुरू हुई बैठक मंगलवार रात के 11 बजे समाप्त हुई। दोनों पक्षों के बीच यह बैठक चुशूल में हुई हालांकि मिली जानकारी के मुताबिक, इसका कोई प्रभावी नतीजा सामने निकलकर नहीं आया है। यह दोनों पक्षों के बीच हुई तीसरी बैठक है। कॉर्प कमांडर स्तर पर पिछली दो बैठकें 6 जून और 22 जून को हुई थीं।
मंगलवार को इस बैठक का आयोजन भारत की तरफ चुशूल में किया गया जबकि पहले की दो बैठकें चीन की तरफ मोल्डो में हुई थी। सूत्र के मुताबिक, मौजूदा गतिरोध के दौरान सभी विवादास्पद क्षेत्रों में स्थिति को स्थिर करने की दिशा में चचार्एं हुईं। चीन पैंगॉन्ग स्तो में वापस लौटने के लिए तैयार हो गया था, लेकिन वह गए नहीं। भारत ने फिंगर 8 पर वास्तविक नियंत्रण रेखा का दावा किया और चीनी फिंगर 4 और 5 प्वॉइंट एस के बीच बैठे हैं। देपसंग और देमचोक में इसी तरह की भिन्नता है।
22 जून को भी बातचीत लगभग 11 घंटे तक चली और दोनों पक्षों के बीच एक आपसी सहमति भी बनी। भारतीय सेना ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में सभी विवादास्पद क्षेत्रों से पीछे हटने की बात पर चर्चा की गई थी। बैठक में जहां भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, वहीं चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिला के मेजर जनरल लियु लिन ने किया। इस दौरान गलवान घाटी पर हुए हमले पर भी बात की गई थी, जिसमें भारत के बीस जवान शहीद हुए हैं।
