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Home » Blog » पूर्वांचल का बाहुबली धनंजय सिंह गिरफ्तार, जानें बाहुबली पूरी कुंडली
उत्तर प्रदेश

पूर्वांचल का बाहुबली धनंजय सिंह गिरफ्तार, जानें बाहुबली पूरी कुंडली

admin
Last updated: April 19, 2026 12:24 pm
admin
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जौनपुर। पूर्वांचल के बाहुबली नेता और बहुजन समाज पार्टी से सांसद रहे धनंजय सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है। जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल को अपहरण और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में धनंजय को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1998 में ही पुलिस ने ‘धनंजय सिंह’ को एनकाउंटर में मार गिराने की घोषणा कर दी थी।

दरअसल 17 अक्टूबर 1998 को पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली कि 50 हजार का इनामी बदमाश धनंजय सिंह अपने 3 अन्य साथियों के साथ भदोही मीरजापुर रोड पर स्थित एक पेट्रोल पंप को लूटने वाला है। पुलिस ने वहां पर छापा मारा और उसे मार गिराया। इतना ही नहीं पुलिस ने इनमें से एक को धनंजय बताकर उसे मृत भी घोषित कर दिया। हालांकि करीब 5 महीने बाद फरवरी 1999 में धनंजय पुलिस के सामने आए और फिर खुल गया भदोही पुलिस के फेक एनकाउंटर का राज। मामले में मानवाधिकार आयोग की जांच बैठी और 34 पुलिसवालों पर मुकदमे दर्ज हुए।

छात्र राजनीति से शुरुआत
धनंजय ने जौनपुर के टीडी कॉलेज में छात्र राजनीति में कदम रखा। इसके बाद वह लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचा और जल्द ही लखनऊ की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो गया। हत्या, डकैती, लूट, रंगदारी, धमकी समेत कई आपराधिक मामले उस पर दर्ज हो गए थे। इसी दौरान धनंजय की मुलाकात बाहुबली छात्रनेता अभय सिंह से हुई थी।

यूं पड़ी दोस्ती में दरार
लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता ने बताया कि धनंजय और अभय में एक समय पर तगड़ी दोस्ती थी। दोनों विश्वविद्यालय के एलबीएस छात्रावास में रहते थे। धनंजय अभय को महामंत्री पद का चुनाव भी लड़वाना चाहते थे, लेकिन इसी बीच वह एक हत्याकांड जेल चले गए। उन्होंने बताया, ‘इसी दौरान दोनों में अनबन शुरू हो गई। तब जेल से पत्र लिखकर धनंजय ने दयाशंकर सिंह को चुनाव में समर्थन करने की घोषणा की।’ आपको बता दें कि दयाशंकर सिंह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। अभय सिंह और धनंजय के बीच विवाद की मुख्य वजह वसूली थी।

बनारस का पहला ‘ओपन शूटआउट’
विधायक रहते हुए धनंजय का पहला शूटआउट छात्र राजनीति के दौर के अपने साथी अभय सिंह से हुआ। 5 अक्टूबर 2002 को वाराणसी से गुज़र रहे धनंजय के काफिले पर हमला हुआ। इसके बाद टकसाल सिनेमा के सामने मुठभेड़ हुई और दोनों तरफ से जमकर गोलियां चलीं। इस शूटआउट में धनंजय के गनर और उनके सचिव समेत 4 लोग घायल हुए थे। इसके बाद धनंजय ने अभय सिंह के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी।

राजनीतिक सफर
2002 में धनंजय ने रारी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2007 के चुनाव में उसने जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। इस बार भी धनंजय ने जीत का स्वाद चखा। 2009 में बीएसपी से वह लोकसभा पहुंचा लेकिन 2011 में मायावती ने उन्हें ‘पार्टी के ख़िलाफ़ काम करने’ की वजह से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद धनंजय फिर कभी खड़ा नहीं हो पाया। 2012 के विधानसभा चुनाव में उसने अपनी पूर्व पत्नी को चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन वह हार गईं। 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी धनंजय को हार का मुंह देखना पड़ा।

धनंजय ने की थीं तीन शादियां
धनंजय सिंह ने तीन शादियां की थीं। उसकी पहली पत्नी ने शादी के नौ महीने बाद ही संदिग्ध परिस्थियों में आत्महत्या कर ली थी। वहीं दूसरी पत्नी डॉक्टर जागृति सिंह से उनका तलाक हो गया था। इसके बाद 2017 में उसने एक व्यवसायिक परिवार से आने वाली श्रीकला रेड्डी से पेरिस में तीसरी शादी की थी।

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