नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से इस मसले पर मोदी सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है और सर्वोच्च अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर करें। कांग्रेस ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है। कांग्रेस ने कहा कि सरकारी नौकरियों में एससी और एसटी आरक्षण को कम नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह हमारे देश के पिछड़े समुदायों के लिए विनाशकारी होगा।
आपको बताते जाए कि बीते दिनों एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसे में कोई अदालत राज्य सरकारों को SC और ST वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का निर्देश नहीं जारी कर सकती है, आरक्षण देने का अधिकार और दायित्व राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर करता है।
कांग्रेस की ओर से संसद में भी इस मसले पर स्थगन प्रस्ताव दिया गया है। ऐसे में ना सिर्फ बाहर बल्कि संसद के अंदर भी सरकार को विपक्ष का गुस्सा झेलना होगा।
आपको बताते जाए कि प्रमोशन में आरक्षण का मामला फिर गरमा गया है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद शुरू हुआ है जिसमें उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया । इसमें राज्य सरकार से कहा गया था कि वह प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए डेटा जुटाए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से यह पता करने को कहा था कि SC-ST कैटिगरी के लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं, जिससे प्रमोशन में रिजर्वेशन दिया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है।

