पूर्व LG नजीब जंग पहुंचे जामिया , कहा-CAA में सुधार जरूरी, शामिल करें मुसलमानों को भी

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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) बने एक महीने से ज्यादा हो गया है। विपक्षी दलों और कुछ लोगों के लिए यह शुरू से ही सिरदर्द बना हुआ है और वे केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस बीच सोमवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया पहुंचे दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने भी इस संबंध में बयान दिया। जामिया में कानून के विरोध में प्रदर्शन जारी है।

जंग ने कहा कि सीएए में सुधार की जरूरत है। या तो इसमें मुसलमानों को भी शामिल करना चाहिए या सभी को हटा देना चाहिए। जंग जामिया के वीसी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सीएए में सुधार की जरूरत है। उन्हें या तो मुसलमानों को भी इसमें जोडऩा चाहिए या अन्य नामों को भी हटाएं। इसे समावेशी बनाएं, मामला खारिज हो जाएगा। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन लोगों को बुलाते हैं और बातचीत करते हैं, तो मामला सुलझ जाएगा।

बातचीत से ही कोई समाधान निकलेगा। अगर हम बात नहीं करेंगे तो समस्या कैसे दूर होगी? यह विरोध कब तक जारी रहेगा? अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, दुकानें बंद हैं, बसें नहीं चल रही। यह तारीख जामिया ने लिखी है और अच्छा बात है यह आंदोलन यहां चल रहा है।

मौलानाओं को इससे दूर रखिए। आप अपने मदरसे में बैठें, इसका नेतृत्व हमारे बच्चे करेंगे। हमें नौकरी और अस्पताल चाहिए, हमें एनपीआर की जरूरत नहीं। श्रीलंका से आए हुए को क्यों छोड़ दिया, क्या नेपाल से लोग हमारे देश नहीं आना चाहते? जो धर्म छूट गया है उसको जोड़ लें या फिर सबको हटा दें।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों जंग, तत्कालीन कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला समेत 106 पूर्व नौकरशाहों (ब्यूरोक्रेट्स) ने सीएए पर सवाल उठाते हुए सरकार को पत्र लिखा था। उन्होंने तर्क दिया कि देश के लिए सीएए, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर), और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जरूरी नहीं है। यह व्यर्थ की कवायद है। इनसे लोगों को परेशानी ही होगी।

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