जामा मस्जिद का निर्माण: 12 साल में बनकर तैयार हुई मस्जिद भारत के लिए क्यों जरुरी

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जामा मस्जिद का निर्माण: दिल्ली की जामा मस्जिद देश की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार है। आय दिन भारी संख्या में लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं। जामा मस्जिद से मुस्लिम धर्म के लोगों का एक अनोखा रिश्ता है. इस मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट ने करवाया था। आज के समय में जामा मस्जिद के नाम से प्रख्यात इस मस्जिद का मूल नाम मस्जिद-ए-जहां नुमा है। जिसका अर्थ है एक मस्जिद जो पूरी दुनिया को एक नजरिया देती है एकजुटता का प्रतीक है. वही आज इस लेख में हम आपको जामा मस्जिद के विषय में विस्तृत जानकारी देने जा रहे हैं।

जानें किसने करवाया था जामा मस्जिद का निर्माण:

जामा मस्जिद मुस्लिम की सबसे बड़ी मस्जिद है। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने 1644 में शुरू करवाया था। मस्जिद को बनकर तैयार होने में 12 वर्ष का समय लगा था। मस्जिद पूर्ण रूप से 1656 में बनकर तैयार हुई। इतिहास की माने तो मस्जिद निर्माण में 5 हजार से ज्यादा मजदूरों ने काम किया था। मस्जिद का उद्घाटन वर्तमान के उज्बेकिस्तान के इमाम सैयद अब्दुल गफूर शाह बुखारी ने किया था।

मस्जिद निर्माण में तकरीबन 10 लाख की राशि खर्च हुई थी। मस्जिद में 3 बड़े-बड़े दरवाजे हैं। 131.2 फीट ऊंचाई के 2 मीनारें हैं। एक बड़ा बरामदा है। बरामदे में तकरीबन 25,000 लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं।

जामा मस्जिद क्यों है खास:

जामा मस्जिद भारत के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इसका निर्माण मुगल सम्राट ने करवाया था। दूर-दूर से लोग जामा मस्जिद के सौंदर्य को देखने आते हैं। लोगों का कहना है जामा मस्जिद का डिजाइन बेहद आकर्षक है। मुस्लिम पर्यटकों के लिए जामा मस्जिद भारत का एक विशेष पर्यटक स्थल है।

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