Sunday, 27 September 2026
Home
jansandeshonline.com
लाइफस्टाइल 11 July 2026• 08:25 AM

Darvaza Gas Crater: धरती का वो कोना जिसे कहते हैं ‘नरक का दरवाजा', आसान भाषा में समझें इसकी पूरी कहानी

Darvaza Gas Crater: हमारी दुनिया रहस्यों से भरी पड़ी है। इंटरनेट पर आपने कई ऐसी अनोखी जगहों की तस्वीरें देखी होंगी, जिन पर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल होता है।

Mehul Pandey

11 July 2026

Darvaza Gas Crater: धरती का वो कोना जिसे कहते हैं ‘नरक का दरवाजा', आसान भाषा में समझें इसकी पूरी कहानी

Darvaza Gas Crater: हमारी दुनिया रहस्यों से भरी पड़ी है। इंटरनेट पर आपने कई ऐसी अनोखी जगहों की तस्वीरें देखी होंगी, जिन पर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल होता है। एक ऐसी ही हैरान करने वाली जगह मध्य एशिया के देश तुर्कमेनिस्तान (Turkmenistan) में मौजूद है।

इस जगह को लोग ‘नरक का दरवाजा’ (Door to Hell) कहते हैं। सोचिए, एक विशाल रेगिस्तान के बीचों-बीच एक ऐसा बड़ा गड्ढा है, जिसमें सालों से आग भभक रही है और आज तक बुझी नहीं है। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे सच में जमीन के नीचे से आग निकल रही हो। अगर आप भी सोच रहे हैं कि आखिर यह आग कैसे लगी, इसे ‘नरक का दरवाजा’ क्यों कहते हैं और क्या यह कोई कुदरती चमत्कार है? तो आज हम आपको बिल्कुल आसान भाषा में इस जगह की पूरी कहानी बताने जा रहे हैं।

क्या है ‘नरक का दरवाजा’ और यह कहां है?

यह रहस्यमयी जगह तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान (Karakum Desert) में स्थित है। इस रेगिस्तान में एक छोटा सा गांव है जिसका नाम डेरवेज (Derweze) है, और यह जलता हुआ गड्ढा इसी गांव के पास मौजूद है।

रात के अंधेरे में जब आप इस गड्ढे को दूर से देखते हैं, तो इसकी आग की रोशनी पूरे इलाके को रोशन कर देती है। यही वजह है कि इसे ‘शाइनिंग काराकुम’ के नाम से भी जाना जाता है। इस गड्ढे की चौड़ाई लगभग 230 फीट है और इसकी गहराई करीब 65 फीट है। इसके पास जाते ही आग की तेज लपटें और गर्मी महसूस होने लगती है, इसलिए कोई भी इसके बहुत करीब जाने की हिम्मत नहीं करता।

कैसे बना यह विशाल गड्ढा? (1971 की वह घटना)

शायद आपको लगे कि यह आग किसी श्राप या जादू का नतीजा है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। नासा (NASA) साइंस की रिपोर्ट और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, यह गड्ढा इंसानों की एक छोटी सी गलती का नतीजा है।

बात साल 1971 की है। उस समय सोवियत संघ (आज का रूस और उसके पड़ोसी देश) के भूवैज्ञानिक (Scientists) तेल और गैस के भंडारों की खोज कर रहे थे। खोज करते-करते वे काराकुम रेगिस्तान में पहुंचे। उन्हें लगा कि जमीन के इस हिस्से के नीचे तेल का एक बहुत बड़ा भंडार छिपा है। वैज्ञानिकों ने तुरंत अपनी भारी-भरकम मशीनें मंगवाईं और खुदाई (Drilling) का काम शुरू कर दिया।
लेकिन, उन्हें जमीन के नीचे की असली स्थिति का अंदाजा नहीं था। भारी मशीनों का वजन रेगिस्तान की वह खोखली जमीन सह नहीं पाई। अचानक जमीन अंदर की तरफ धंसने लगी और वहां एक बहुत बड़ा गड्ढा बन गया।

आखिर गड्ढे में आग क्यों लगाई गई? (वैज्ञानिकों की सोच)

गड्ढा बनने के बाद वैज्ञानिकों की परेशानी और बढ़ गई। जमीन के नीचे से तेल के बजाय भारी मात्रा में ‘मीथेन’ नाम की प्राकृतिक गैस (Natural Gas) बाहर निकलने लगी।

हालांकि यह गैस जहरीली नहीं थी, लेकिन यह हवा में मौजूद ऑक्सीजन को खत्म कर रही थी। इसके कारण वहां सांस लेना मुश्किल होने लगा था। सबसे ज्यादा खतरा रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों और आस-पास के गांव वालों को था। अगर कोई जानवर इस गड्ढे के पास जाता, तो ऑक्सीजन की कमी से उसकी तुरंत मौत हो जाती।

इसके अलावा, हवा में इतनी गैस फैलने से किसी बड़े ब्लास्ट (धमाके) का खतरा भी बना हुआ था। इस खतरे को टालने के लिए वैज्ञानिकों ने एक उपाय सोचा। उन्होंने सोचा कि क्यों न इस गैस में आग लगा दी जाए। उनका अनुमान था कि गड्ढे के अंदर जितनी भी गैस होगी, वह कुछ ही दिनों या हफ्तों में जलकर खत्म हो जाएगी और आग अपने आप बुझ जाएगी। इसी सोच के साथ उन्होंने उस गड्ढे में आग लगा दी।

50 साल बाद भी क्यों नहीं बुझी आग?

वैज्ञानिकों ने आग तो लगा दी, लेकिन उनका अनुमान पूरी तरह गलत साबित हुआ। गड्ढे के नीचे गैस का भंडार इतना बड़ा था कि वह आग आज तक नहीं बुझी।

साल 1971 से लेकर आज तक (50 साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद) यह आग बिना रुके दिन-रात जल रही है। जब तक जमीन के नीचे प्राकृतिक गैस मौजूद रहेगी, यह आग ऐसे ही जलती रहेगी। साल 2010 में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति भी इस जगह का दौरा करने पहुंचे थे। उन्होंने भी इस लगातार जलती आग को देखकर चिंता जताई थी कि इससे आस-पास मौजूद गैस के दूसरे भंडारों को नुकसान पहुंच सकता है।

आज कैसा है वहां का नजारा?

आज के समय में यह ‘दरवाजा’ तुर्कमेनिस्तान का एक बहुत बड़ा टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है। दुनिया भर से लोग इस ‘जलते हुए गड्ढे’ को देखने आते हैं। यह जगह हमें बताती है कि प्रकृति के पास संसाधनों का कितना बड़ा खजाना है और इंसान कभी-कभी अपने अनुमानों में कितनी बड़ी गलती कर सकता है। अगर आप भी कभी मध्य एशिया घूमने जाएं, तो इस अनोखे और हैरान कर देने वाले ‘नरक के दरवाजे’ को दूर से देखना एक यादगार अनुभव हो सकता है।

Read Next

उत्तर प्रदेश

यूपी में फिर बदलेगा मौसम: बुधवार से लखनऊ सहित 40 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात के आसार

उत्तर प्रदेश में बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम के कारण बुधवार से लखनऊ सहित 40 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात की संभावना है।

Kavita Kelkar• 21 September 2026
राष्ट्रीय

UPI Charge Dispute: क्या अब यूपीआई पेमेंट पर देना होगा चार्ज? नीति आयोग ने बताया क्यों जरूरी है यह शुल्क

क्या अब यूपीआई से लेन-देन पर चार्ज देना होगा? नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और बैंकों की वित्तीय सेहत के लिए मामूली शुल्क जरूरी है।

Kavita Kelkar• 16 September 2026