Crime news: शनिवार का दिन था इंदौर की स्वर्णबाग कॉलोनी का एक मकान सुबह होने से पहले ही धू धूकर जलने लगा और लोग गहरी नींद की आगोश में तभी मकान जलने और धुएं के फैलने से पूरी बिल्डिंग उसकी चपेट में आ गई। लोगों को समझ ही में नहीं आ रहा था कि ये आग आखिर लगी तो लगी कैसे। आग और धुएं की जद से लोगों की जद्दोजहद के बीच आठ लोग बुरी तरह से झुलस गए, जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई।
जबकि पड़ोसी और पुलिस की जद्दोजहद के बाद नौ लोगों को बचाया जा सका। हालांकि शुरुआती दौर में तो शक शॉर्ट सर्किट पर ही हुआ। लेकिन जब पुलिस ने बारीकी से तहकीकघत की तो बहुत कुछ सामने आ गया । वो आग खुद लगी नहीं थी बल्कि लगाई गई थी। और इस आग को लगाने का काम किया था एक ऐसे सिरफिरे ने जिसने अपनी एक सनक की वजह से इस वारदात को अंजाम दिया था।
पुलिस ने बिल्डिंग को आग के हवाले करने के इल्जाम में एक शख्स को गिरफ्तार किया जिसकी पहचान संजय उर्फ शुभम दीक्षित के तौर पर हुई। संजय को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसका मोबाइल और मोबाइल में 16 जीबी का डाटा खंगाल डाला।संजय के मोबाइल ने ही पुलिस को बताया कि संजय दरअसल सोशल मीडिया पर लड़कियों और महिलाओं को अपनी बातों के जाल में फंसाता था। और फिर उनके बैंक डिटेल्स हासिल करके सभी के बैंक खातों में सेंध भी लगाता था। इतना ही नहीं। संजय एक चीज अक्सर गूगल पर पुलिस से बचने के तरीकघ्े सर्च करता रहता था।
बकौल पुलिस संजय सोशल मीडिया के जरिए जिन लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था, उसके साथ में हर हाल में फ्रॉड जरूर करता था। पुलिस के मुताबिक घटना वाली रात से पहले भी वो स्वर्णबाग बिल्डिंग में रहने वाली एक महिला मित्र की मां से झगड़ा किया था। उसी झगड़े के बाद संजय ने अपनी महिला मित्र के साथ साथ उसकी मां को सबक सिखाने और उन्हें गहरी चोट देने के इरादे से उस रात उसने बिल्डिंग के नीचे खड़ी उसकी स्कूटी को आग लगा दी थी। लेकिन जब उसने स्कूटी को आग लगाई तो वो आग फैलती हुई पहले तो आस पास की दूसरी गाड़ियों तक जा पहुँची।
और उन्हीं गाड़ियों से उठी लपटों ने बिल्डिंग को भी अपनी चपेट में ले लिया। और देखते ही देखते उस बिल्डिंग के तमाम लोग गहरी नींद में ही मौत के बेहद नजदीक पहुँच गए, लेकिन सात लोग तो जिंदा जल गए।
