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कुशीनगर में जिला जेल के मुद्दे को लेकर की गई अनदेखी 26 वर्षो कैदियों के लिए बना नासूर

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कुशीनगर : देवरिया जिले से कट कर 13 मई 1994 को अलग अस्तित्व में आए कुशीनगर जिले को 26 वर्ष बाद भी एक अदद जेल नसीब नहीं हो सकी है। जबकि यहां का प्रतिनिधित्व भाजपा,सपा के सांसद कर चुके है.हालाकी पडरौना स्टेट के कुंवर आरपीएन सिंह प्रतिनिधित्व कर चुके है। जबकि यहां पुर्व के बसपा सरकार में मंत्री रहे और अब बीजेपी के स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा भी इसे इग्नोर करते चले आ रहे हैं.ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है.कि कैदियों के परिजनों को कितनी परेशानी उठानी पड़ती है।
बिहार बार्डर से सटे होने के कारण यह जिला आपराधिक घटनाओं में कभी पीछे नहीं रहा। कभी गन्ना,गुंडा व गंडक के नाम से मशहूर रहे इस जिले की आबादी वर्तमान में करीब 36 लाख से आगे के करीब पहुंच गया है.अपराध पर नियंत्रण करने के लिए अलग अलग इलाकों में कुल 17 थाने व करीब आधा  दर्जन से अधिक पुलिस चौकियां स्थापित हुई.चाहे संगीन आपराधिक मामले हों या फिर मारपीट की घटनाएं करीब दो से तीन दर्जन के बीच मामलों में प्रतिदिन आरोपियों को पुलिस जेल भेजती है.करीब 70 से 90 के बीच कैदी जिला एवं सत्र न्यायालय तथा कसया कोर्ट में पेशी पर प्रतिदिन दो वाहनों पर लाए व वापस ले जाए जाते है.इसके लिए पर्याप्त फोर्स की व्यवस्था करनी पड़ती है.ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी कम नहीं होती है। कभी देवरिया का अहम हिस्सा रहा पडरौना 1928 से 1950 तक टाउन एरिया रहा.तब यहां राजा ब्रज नरायन सिंह चेयरमैन रहे.इसके बाद 1952 में नपा का गठन हुआ.लेकिन स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आने के बाद भी यहां जेल का निर्माण नहीं हुआ।
हालांकि कसया थाने के पीछे अंग्रेजों का बनवाया गया मिनी जेल था लेकिन अस्सी से नब्बे के दशक में आधा दर्जन कैदियों के जेल फांद कर भागने के कारण इसे बंद कर दिया गया.अब पूरे जिले के कैदी देवरिया जेल ही भेजे जाते है.पिछले 26 वर्षो से इस जिले के बंद कैदियों से मिलने जाने के लिए परिजनों को जेल में मिलाई खर्च के अलावा भाड़ा की व्यवस्था करने के लिए एकबारगी सोचना पड़ता है.क्योंकि वहां जाने पर दिन भर का समय बर्बाद तो होता ही है आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ती है.इतना ही नहीं कई गरीब परिवार अपने बंदी परिजन से मिलने देवरिया जाने के बजाय जिला सत्र न्यायालय या फिर कसया कोर्ट में पेशी पर ही मिल कर खून का घूंट पीकर रह जाते है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि विधान सभा व लोकसभा क्षेत्र के मामले में धनी रहे इस जिले के जनप्रतिनिधियों ने कभी इसे मुद्दा नहीं बनाया। यहां तक कि बीजेपी के सांसद बिजय कुमार दुबे पडरौना शहर से विधायक व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी इस मुद्दे की अनदेखी की। यही कारण है कि जेल का मामला यहां के लोगों के लिए नासूर बन गया है।
“जनपद सृजन के बाद जिला मुख्यालय के सभी सरकारी कार्यालयों का निर्माण पुर्व सीएम मायावती द्वारा ही कराया गया है,जबकि
जिला कारागार एवं मंडी समिति की जमीन अधिग्रहण का कार्य बसपा सरकार में पुर्व सीएम मायावती के द्वारा ही किया गया था,इतना ही नहीं कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट 5 सितंबर 1995 को प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने बौद्ध तीर्थस्थल कुशीनगर के अंतरराष्ट्रीय महत्व को देखते हुए कसया हवाई पट्टी के निर्माण की घोषणा की वयहां उनके नाम का शिलापट्ट आज भी उसकी गवाही दे रहा है,इसके बाद 10 अक्टूबर 1995 हवाईपट्टी के लिए टर्मिनल बिल्डिंग का शिलान्यास किया था,टर्मिनल बिल्डिंग तीन वर्ष के भीतर बनकर तैयार हुआ और दो रडार भी लगाए गए परंतु विमानों का नियमित उड़ान शुरू नहीं हो सका,वर्ष 2008 में फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने बजट सत्र में कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का अध्यादेश भी जारी किया परंतु विपक्ष और किसानों के विरोध के चलते अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का कार्य रुक गया,जो पिछले 10 वर्ष से सपा भाजपा की सरकारों की निष्क्रियता के कारण अभी तक एयरपोर्ट चालू नही हो पाया।”
शाहिद लारी – वरिष्ठ बसपा नेता कुशीनगर
“जिला जेल बनने के लिए पूर्व मंत्री रहते हुए स्वर्गीय सीपीएन सिंह ने इसके लिए पहल की थी लेकिन चकबंदी के बाद पडरौना शहर से सटे नाहर छपरा गांव में भू माफियाओं ने जमीन की हेराफेरी करना शुरू कर दिया,जिसके वजह से यह मामला दब गया,इसके बाद पूर्व मंत्री आरपीएन सिंह ने अपने कार्यकाल में एसएसबी सेंटर का शिलान्यास कराया, जबकि रजवटिया में गैस प्लांट बैठाने का भी प्रयास किया है,इन सबके बीच प्रदेश में जिनके सरकार रहें वे जिला जेल के लिए कोई पहल नहीं की,और किसानों को सस्ते में जमीन लेने के वजह से आज भी अधूरा में पड़ा हुआ है।”
शमशेर मल्ल जिला कांग्रेस मीडिया प्रभारी
“जनपद सृजन के 26 वर्ष व्यतीत होने के बावजूद भी जिला कारागार का निर्माण न होना दुर्भाग्यपूर्ण है,इसके लिए जनपद के सभी दलों के पूर्व व वर्तमान जनप्रतिनिधि गण सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं,यदि इन्होनें ईमानदारी से प्रयास किया होता तो जिला कारागार का निर्माण अब तक हो चूका होता ?”
 गिरीश चतुर्वेदी,सिविल सोसायटी अध्यक्ष-कुशीनगर
“पूर्व सांसद बालेश्वर यादव ने कुशीनगर जिला के गठन होने के बाद चुने गए सांसद के दौरान ही उस समय के प्रदेश के मंत्री रहे संभवत बलराम यादव से लेकर कानून मंत्री तक जिला जेल बनने के लिए आवाज उठाई थी,हालांकि जिला जेल के लिए उस समय पडरौना शहर के बाहर रामधाम धोबआ पर लोगों की सुरक्षा के हिसाब से  जमीन की एकवायर कराई गई गई थी,इन सबके बीच जिला मुख्यालय के निकट सोहरौना में सब्जी मंडी के लिए भी उन्होंने अपने सांसद रहने के दौरान कॉल किए थे,पूर्व सांसद के कार्यकाल के बाद जो भी यहां का सांसद रहा जिला जेल के लिए अगर सही रूप से पहल की होती तो आज जेल बनकर तैयार हो गया होता।”
सोनू तिवारी समाज सेवी

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