भारत ने अफगानिस्‍तान पर अंतरराष्‍ट्रीय कॉन्‍फ्रेंस बुलाई है जिसमें पाकिस्‍तान को भी न्‍योता भेजा

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नई दिल्‍ली

भारत और पाकिस्‍तान के रिश्‍तों पर जमी बर्फ की मोटी चादर थोड़ी पिघलती दिख रही है। पिछले कुछ दिनों से मिल रहे संकेत यही इशारा करते हैं कि बातचीत के दरवाजे फिर खुल सकते हैं। द्विपक्षीय न सही, मगर भारत और पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जल्‍द एक मंच पर नजर आ सकते हैं। भारत ने अफगानिस्‍तान पर अंतरराष्‍ट्रीय कॉन्‍फ्रेंस बुलाई है जिसमें पाकिस्‍तान को भी न्‍योता भेजा गया है।

तालिबान की एंट्री से बदले समीकरण!

इसी महीने की शुरुआत में भारत ने SCO एंटी-टेरर एक्‍सरसाइज के लिए तीन सीनियर अधिकारियों को पाकिस्‍तान भेजा था। फरवरी 2021 में दोनों देशों के बीच बैक-डोर बातचीत के चलते 2003 संघर्ष विराम समझौते को लेकर नई सहमति बनी थी। अफगानिस्‍तान में तालिबान के सत्‍ता पर काबिज होने से क्षेत्रीय संतुलन बदल गया है। ऐसे में भारत अगर पाकिस्‍तान को बातचीत के सिग्‍नल दे रहा है तो पाकिस्‍तान की ओर से भी थोड़ी गर्मजोशी नजर आई है। शनिवार को पाकिस्‍तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता आसिम इफ्तिखार ने कहा कि ‘नीति के आधार पर, उनका देश नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम जारी रखना चाहता है।’

क्‍या भारत आएंगे पाकिस्‍तान NSA?

दिल्‍ली में होने वाली कॉन्‍फ्रेंस की अध्‍यक्षता NSA अजीत डोभाल करेंगे। कॉन्‍फ्रेंस के लिए पाकिस्‍तान के अलावा रूस, चीन, ईरान, ताजिकिस्‍तान और उज्‍बेकिस्‍तान को भी न्‍योता दिया गया है। यह देखना दिलचस्‍प होगा कि कॉन्‍फ्रेंस में पाकिस्‍तान की क्‍या भूमिका रहती है। पाकिस्‍तानी NSA मोईद युसूफ भारत आकर कॉन्‍फ्रेंस में शामिल होंगे या नहीं, यह भी एक सवाल है।

भारत ने बार-बार कहा है कि बातचीत से पाकिस्‍तान को पहले अपनी धरती से चलने वाली आतंकी समूहों पर नकेल कसनी होगी। हालांकि पर्याप्‍त संकेत दिए गए हैं कि अगर वह क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्‍म पर ऐक्‍शन लेने की दिशा में गंभीर है तो भारत को साथ काम करने से गुरेज नहीं है।

क्‍यों जग रही उम्‍मीद?

अगर युसूफ भारत आते हैं तो उनकी यात्रा पर सबकी नजरें होंगी। आखिरी बार पाकिस्‍तान से इस स्‍तर का कोई अधिकारी 2016 में भारत आया था। तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ‘हार्ट्स ऑफ एशिया’ कॉन्‍फ्रेंस के लिए अमृतसर में थे। युसूफ उन NSAs में हैं जिन्‍हें इस साल भारत ने मई में प्रस्‍तावित कॉन्‍फ्रेंस के लिए भी न्‍योता भेजा था। तब दिल्‍ली में कोविड-19 की दूसरी लहर के चलते कॉन्‍फ्रेंस नहीं हो सकी।

काबुल में सत्‍ता बदली तो मन भी?

गृह मंत्रालय के अनुसार, 2010 से फरवरी 2021 के बीच LoC पर 14,000 से ज्‍यादा फायरिंग और सीजफायर उल्‍लंघन की घटनाएं हुईं। फरवरी में जब भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से समझौता हुआ तो कई एक्‍सपर्ट्स ने उसे बातचीत की दिशा में पहले कदम के रूप में देखा। हाई कमिश्‍नर्स को बहाल करना हो या फिर पाकिस्‍तान में SAAC सम्‍मेलन का आयोजन और व्‍यापारिक रिश्‍तों ही बहाली, दोनों देशों के बीच रिश्‍ते सुधरने की उम्‍मीद जताई गई। हालांकि काबुल में सत्‍ता-परिवर्तन पाकिस्‍तान के मन-मुताबिक हुआ है और भारत नई हुकूमत के रवैये को लेकर संशकित है। सीमापार से आतंकवाद का खतरा बढ़ गया है।

बैक-डोर से चलती रही बातचीत

भारत और पाकिस्‍तान के बीच पर्दे के बीच बातचीत चलती रही है। दोनों देशों के मिलिट्री और इंटेलिजेंस अधिकारियों के बीच बैक-डोर बातचीत का नतीजा फरवरी 2021 में दिखा। भारत और पाकिस्‍तान दोनों ही, 2003 में हुए संघर्ष विराम समझौते का पालन करने पर सहमत हुए। उसके बाद से एलओसी पर सीजफायर उल्‍लंघन में खासी कमी देखने को मिली। हालांकि सितंबर-अक्‍टूबर के महीने में घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों में तेजी दिखी है। अक्‍टूबर 2021 की शुरुआत में भारत ने तीन सदस्‍यीय दल को SCO एंटी-टेरर एक्‍सरसाइज में हिस्‍सा लेने इस्‍लामाबाद भेजा।

अगर बातचीत का मन तो फिर कश्‍मीर में क्‍या कर रहा है पाकिस्‍तान?

एक तरफ पाकिस्‍तान के तेवरों में थोड़ी नरमी है, दूसरी तरफ उसकी गतिविधियां संदिग्‍ध हैं। खासतौर से कश्‍मीर घाटी में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ हो रहा है, उसमें पाकिस्‍तानी साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। पिछले एक हफ्ते में घाटी के भीतर 9 सैनिकों ने एलओसी के पास काउंटर-टेररिज्‍म ऑपरेशन में शहादत दी है। आतंकियों ने घाटी में अल्‍पसंख्‍यकों और गैर-कश्‍मीरियों को भी निशाना बनाया है।

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