परिजनों की इच्छाशक्ति ने बचा लीं कई जाने, संदीप का अंगदान बना संजीवनी

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डेस्क। क्या आप अपने किसी करीबी के अंगदान के लिए आसानी से मान जाएंगे। किसी अपने की मृतु के बाद उसका अंगदान करना निश्चित ही एक कठोर निर्णय है। लेकिन आपके अंगदान से कई लोगों को जीवनदान दिया जा सकता है। इसी कड़ी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डाक्टरों के समझाने और परिवार की इच्छाशक्ति के करण चार मरीजों को नया जीवन मिला। 

बता दें कि रविवार को एम्स में एक मृतक के परिजनों ने अंगदान करने का फैसला किया। जिसके बाद यह अंग एम्स और लोहिया अस्पताल में मरीजों को लगाए गए। 32 साल के संदीप को सड़क किनारे घायल अवस्था में पाया गया था।

आगे एम्स के चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल में लाए जाने पर पाया गया कि युवक की दिमागी तौर पर मृत्यु हो गई है। संदीप के परिजनों को इसकी सूचना दी गई। पहले संदीप के परिजनो ने अंगदान से इनकार कर दिया। फिर डॉक्टर्स ने उनकी करीब 1 घंटे तक काउंसिलिंग की जिसके बाद वो मान गए। 

चिकित्सक दीपक गुप्ता ने बताया कि घायल संदीप को पारस अस्पताल से यहां एम्स ट्रामा सेंटर लाया गया था। जिसके बाद उसकी मृत होने की खबर के बाद परिजनों तक पहुँचाई गई और घर वालो को अंगदान के लिए मनाया गया। संदीप के दिल को एम्स के कार्डियो सर्जरी में 16 साल के बच्चे को दिया गया। एम्स के डा मिलिंद होते ने बताया कि अगर बच्चे को संदीप का हृदय न लगाया गया होता तो उसका जीवन सिर्फ एक साल ही का बचा था।

साथ ही संदीप का लिवर एम्स की ही नर्स के पति में प्रत्यारोपित किया गया। एक गुर्दे को एम्स के गुर्दा रोगी को लगाया गया, और दूसरे गुर्दे को राममनेहर लोहिया अस्पताल में पंजीकृत मरीज में। 

इस तरह संदीप ने 4 लोगों को एक साथ जीवनदान दिया। यह अंग न मिलते तो उन मरीजों की कुछ ही सालों में मृतु निश्चित थी। 

संदीप के भाई नीरज व प्रवीण के मुताबिक उनके भाई संदीप टैटडी नाम के एक ऐप आधारित ड्राइविंग सेवा में काम करते थे। शुक्रवार को वह दुर्घटना का शिकार हुआ, जिसके बाद उसे पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। पारस अस्पताल में इलाज के लिए तीन लाख रुपए मांगने पर एम्स लाया गया।

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