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तबलीगी जमात को बैन किए जाने राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने की मांग, लिखी मुख्य सचिव को चिट्ठी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश

में लगातार बढ़ रहे कोरोना (COVID-19) संक्रमण के मामलों से स्वास्थ्य महकमा परेशान है। महामारी को रोकने के प्रयास जारी हैं लेकिन इन सबके बीच प्रशासन के लिए तबलीगी जमाती (Tablighi Jamati) चुनौती बने हुए हैं। प्रदेश में लगातार जो मामले कोरोना के सामने आ रहे हैं, उनमें कई जमात से जुड़े हुए लोग हैं। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग (UP Minority Commission) ने प्रदेश में तबलीगी जमात को प्रतिबंधित करने की मांग की है। इसके लिए आयोग के सदस्यों ने मुख्य सचिव राजेद्र कुमार तिवारी को चिट्ठी लिखकर इसे बैन किए जाने की मांग की है।

राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य परविंदर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि लगातार निजामुद्दीन से आकर पूरे प्रदेश में जमातियों ने कोरोना महामारी को फैलाया है। ये लोग कभी मदरसों में, कभी मस्जिदों में, कभी मुस्लिम बस्तियों में छिपकर मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं और कोरोना वायरस फैला रहे हैं । हमारी राज्य सरकार से मांग है कि तबलीगी जमातियों को तत्काल प्रतिबंधित किया जाना चाहिये।

परविंदर सिंह ने कहा कि आयोग के सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यह संस्तुति (सिफारिश) की है। आयोग के तमाम सदस्यों ने इस मसले पर विचार-विमर्श किया और उसके बाद इस अंतिम नतीजे पर पहुंचे हैं. लिहाजा तबलीगी जमातियों पर प्रदेश सरकार तुरंत प्रतिबंध लगाए. बता दें इससे पहले भी राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने तबलीगी जमात को बैन करने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था।

उधर यूपी में अपना क्वारेंटाइन (Quarantine) पूरा कर चुके देशी, विदेशी बंदियों के लिए कुल 34 अस्थाई जेल बनाई गई है. यहां 156 विदेशी जमातियों के साथ कुल 288 आरोपी रखे गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 65 विदेशी जमाती सहारनपुर जेल में बंद हैं।विदेशी जमातियों पर टूरिस्ट वीजा पर जमाती गतिविधियों में शामिल होने और लॉकडाउन तोड़ने और एपिडेमिक एक्ट उल्लंघन का आरोप है।

प्रदेश के डीजी जेल आनंद कुमार ने बताया कि अस्थायी जेलों में बंद विदेशी जमातियों में बांग्लादेश के 34, इंडोनेशिया के 41, किर्गिस्तान के 23, सूडान के 14, थाईलैंड के 13, मलेशिया और तजाकिस्तान के दो-दो, नेपाल, सऊदी अरब, फ्रांस, फिलिस्तीन, सीरिया, माली, मोरक्को के एक-एक आरोपी हैं. प्रत्येक अस्थायी जेल में एक डिप्टी जेलर की तैनाती इंचार्ज के तौर पर की गई है. कोर्ट के आदेश पर सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में अस्थाई जेलों में रखे गए हैं.।

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