जानें क्यों मेनका ने त्याग दिया था गांधी परिवार

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देश– कांग्रेस सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाती थी। बीते कुछ सालों में जनता से भले ही कांग्रेस को प्यार न मिला हो। लेकिन अतीत में कांग्रेस का वर्चस्व हर जगह देखा गया। कांग्रेस की बागडोर गांधी परिवार के हाथ में है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस के कर्ताधर्ता हैं।
वहीं जब बात वरुण गांधी और मेनका गांधी की आती है। तो कई सवाल खड़े हो जाते हैं। क्योंकि यह इस समय बीजेपी से सांसद हैं। वहीं इनके परिवार की खुद की राजनीतिक पार्टी होने के बाद ऐसा क्या हुआ कि इन्हें भाजपा जॉइन करनी पड़ गई।

क्यों मेनका ने छोड़ा गांधी परिवार- 

बात बहुत पुरानी नहीं है। इंदिरा गांधी के दो बेटे राजीव गांधी और संजय थे। राहुल गांधी राजीव गांधी के पुत्र हैं और वरुण गांधी संजय गांधी के पुत्र हैं। राहुल का जन्म 19 जून 1970 को हुआ था। वहीं वरुण गांधी का जन्म 13 मार्च 1980 को हुआ था। दोनों का बचपन एक साथ बीता लेकिन जवानी में दोनो अलग हो गए और पारिवारिक मतभेद के कारण वह एक साथ नहीं हैं।
1980 में इंदिरा गांधी पुनः भारत की प्रधानमंत्री बनीं। उसी दौरान संजय गांधी की विमान हादसे में मौत हो गई। मेनका गांधी की उम्र महज 25 वर्ष थी। विरासत राजीव गांधी के हाथ मे जा रही थी। मेनका और सोनिया के मध्य मतभेद बढ़ने लगा। दोनो का एक छत के नीचे रहना मुश्किल हो गया और 1982 में मेनका गांधी ने प्रधानमंत्री आवास त्याग दिया।
मेनका ने इंदिरा गांधी से भी बात करने के लिए प्रयास किया लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद से उन्होंने गांधी परिवार से मुह मोड़ लिया और वह कांग्रेस विरोधी बन गईं।

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