जाने संक्षेप में यूयू ललित को और उनके काम को

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देश: आज देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस यूयू ललित ने शपथ ग्रहण की है और अब वह भारत के चीफ जस्टिस बन गए हैं। यूयू ललित को मुख्य न्यायाधीश की शपथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई है। यूयू ललित भारत के दूसरे ऐसे चीफ जस्टिस होंगे जो वकील से सीधे मुख्य न्यायाधीश बने है। यूयू ललित महज 73 दिनों के लिए भारत के न्यायधीश बने है। इनका कार्यालय केवल 8 नवम्बर तक रहेगा। 

अब अगर हम चीफ जस्टिस यूयू ललित के बारे में बात करे तो यह साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और आज उन्होंने एनवी रमन्ना की जगह पर चीफ जस्टिस के पद को संभाला है। इनका कार्यकाल 73 दिनों का रहेगा। इसके पीछे कारण इनकी उम्र है। असल मे 65 साल की उम्र में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का रिटायरमेंट होता है। वही इस साल 8 नवंबर को इनकी उम्र 65 साल हो जाएगी।
जानकारी के लिये बताते चले यूयू ललित एक ऐसे चीफ जस्टिस है जिन्होंने कई मुकदमों को खुद से अलग किया है। उन्होंने यह दलील देते हुए खुद को मुकदमों से अलग किया है। की यह केस कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट है। इसका सीधा मतलब होता है किसी पार्टी से कनेक्शन या मुकदमा किसी पार्टी का सरोकार है।
यूयू ललित की वकालत की यात्रा 1983 से शुरू हुई थी। इन्होंने इस साल मुंबई हाई कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी। यह यहां साल 1985 तक रहे। 1986 से 1992 के बीच वो पूर्व सॉलिसिटर जनरल सोली सोराबजी के साथ काम किया। वही साल 2004 में जस्टिस यूयू ललित को सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट के रूप में नियुक्त किया गया था।
वही जब 2g घोटाला हुआ तो इस घोटाले में इन्हें स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किया था। उन्हें वकालत का विशेषज्ञ माना जाता है। कई बड़े मामलों में उनका नाम जुड़ा रहा है। यह वही जस्टिस है जिन्होंने तीन तलाक की वैधता पर दलील दी थी कि यह एक महिला के मूल अधिकारों का उलंघन करती है। 
इसके अलावा जस्टिस यूयू ललित ने अनुसूचित जाति और जनजातियों के उत्पीड़न रोकने वाले 1989 के क़ानून का दुरुपयोग रोकने के लिए कई उपायों की व्यवस्था की थी। इसके अलावा इन्होंने एक अन्य याचिका पर कहा था कि हिंदू विवाह कानून की धारा 13बी2 के तहत आपसी सहमति से तलाक़ लेने के लिए छह महीने की प्रतीक्षा अवधि अनिवार्य नहीं है।

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