रोजगार: हिमाचल प्रदेश कोर्ट ने कर्मचारी आयोग पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है। सूत्रों का कहना है कि कोर्ट ने यह जुर्माना कर्मचारी चयन आयोग पर इसलिए लगाया है क्योंकि SSC ने आयुर्वेद विभाग में फार्मासिस्ट में के चयन के मामले में एक उम्मीदवार के प्रति दोहरा और टकरावपूर्ण व्यवहार का प्रदर्शन किया है। कोर्ट ने ssc को 10 अगस्त तक का समय दिया है यह जुर्माना भरने के लिये।
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने कहा, आयोग ने उम्मीदवार के साथ जो व्यवहार किया वह बेहद दुखद है। आयोग को इसके लिए 10 लाख का जुर्माना भरना होगा। हालाकि अभी तक कोर्ट ने यह निर्धारित नही किया है कि आयोग जुर्माने की राशि कहां जमा करेगा। कोर्ट ने कहा, उम्मीदवार कमजोर वर्ग से है। सरकारी नौकरी पाना उसका सपना है लेकिन आयोग के इस वर्ताव ने उसके सपने को सूली चढ़ा दिया है। अब तो ईश्वर ही भर्ती एजेंसी का उद्धार कर सकते हैं और उन्हें बचा सकते हैं।
जानकारी के लिये बता दें उम्मीदवार भूमिहीन था। आयोग की ओर से भूमिहीन होने का एक अंक नहीं दिया था, जिस कारण उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है और आयोग पर 10 लाख रु जुर्माने के तौर पर राशि जमा करने को कहा है। आयोग ने कहा है कि उम्मीदवार से समय पर भूमिहींन होने का प्रमाण पत्र जमा करने को कहा गया था लेकिन उसने ऐसा नही किया। लेकिन उम्मीदवार ने दावा किया है कि उसने भूमिहीन होने का प्रमाण पत्र समय पर जमा किया था लेकिन मूल्यांकन टीम ने उसके प्रमाण पत्र पर कोई विचार नही किया। हालाकि कोर्ट ने उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाया है और आयोग पर उसके इस व्यवहार के कारण 10 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
