जाने जनता के राष्ट्रपति कलाम की कहानी

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एपीजे अब्दुल कलाम: आज देश के 11 वें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 83 वर्ष की उम्र में शिलांग में उनका निधन हो गया था। 1952 में सी वी रमन को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनके बाद यह सम्मान किसी को नही प्राप्त हुआ। लेकिन जब इंदर कुमार गुजराल की सरकार गिरने वाली थी वह भाजपा के तानों से तंग आ चुके थे। उन्हें एक कमजोर प्रधानमंत्री बताया जा रहा था तो उन्होंने दुनिया को यह बताने के लिये कि वह भारत की सुरक्षा को कितना तबज्जुब देते हैं। इसके लिये भारत रत्न एपीजे अब्दुल कलाम को भारत रत्न देकर सम्मानित करने का फैसला किया।

1 मार्च 1998 को मिशाइल मैंन के नाम से जाने जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। जब उन्हें यह सम्मान मिला तब वह काफी असहज महसूस कर रहे हैं। कलाम को नही समझ आ रहा था कि लोगो के बीच वह किस तरह का व्यवहार करें। वह ऐसे मौकों से दूर भागते थे जहाँ उन्हें दिखावा करना पड़ता था और ऐसे वस्त्रों को धारण करना पड़ता था जिनमे वह सहज नही रहते थे। जब एपीजे अब्दुल कलाम को भारत रत्न से सम्मानित किया गया तो सबसे पहले उन्हें अटलबिहारी वाजपेयी ने शुभकामनाएं दी।
वाजपेयी कलाम से पहली बार 1980 मे मिले थे। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने उन्हें और प्रोफ़ेसर सतीश धवन को एसएलवी 3 के सफलतापूर्ण प्रक्षेपण के बाद प्रमुख साँसदों से मिलने के लिए बुलवाया था। जब कलाम को पता चला तो वह घबरा गए थे उन्होंने सतीश धवन से कहा मैं वहां कैसे जा सकता हूँ वहां जाने के लायक न तो मेरे पास कपड़े है और न जूते मैं असहज महसूस करूंगा। कलाम की यह बातें सुनकर धवन ने कहा तुम बिना बात के परेशान हो वहां तुम्हारा जाना आवश्यक है क्योंकि अब तुन्हें किसी भी अच्छे कपड़े की जरूरत नही है तुम्हे शरीर पर अब सफलता का वस्त्र चमक रहा है।
जब वाजपेयी जी की सरकार बनी तो उन्होंने कलाम को अपने मंत्रिमंडल में शामिल होने का न्योता दिया लेकिन कलाम उसमे शामिल नहीं हुए। अगर उस समय कलाम उनके मंत्रिमंडल में शमिल हो जाते तो उन्हें एक काबिल मंत्री मिलता और मुस्लिम समाज को एक संदेश। वाजपेयी को यह अचंभित कर गया कि आखिर कलाम ने इस पद को क्यों अस्वीकार कर दिया लेकिन 2 महीने बाद पोखरण में परमाणु विस्फोट सभी को यह पता चल गया कि कलाम मंत्रीमंडल में क्यों नही शामिल हुये।
10 जून, 2002 को एपीजे अब्दुल कलाम को अन्ना विश्वविद्यलय के कुलपति डाक्टर कलानिधि का संदेश मिला कि प्रधानमंत्री कार्यालय उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। जब कलाम प्रधानमंत्री से कनेक्ट हुए फोन पर दोनो के मध्य बातचीत चल ही रही थी कि प्रधानमंत्री ने कहा कलाम साहब देश को आपकी जरूरत है राष्ट्रपति के रूप में आप देश की बागडोर संभाले। कलाम ने वाजपेयी की इस पेशकश पर विचार का समय मांगा ओर बाद उन्होंने इसके लिये हांमी भर दीं यह पूरे भारत के लिए गर्व का दिन था।
18 जून, 2002 को कलाम ने अटलबिहारी वाजपेई और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों की उपस्थिति में अपना नामाँकन पत्र दाखिल किया। कलाम के नामांकन से सभी खुश थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे मजाक किया कि आप मेरी तरह कुँवारे है। कलाम ने वाजपेयी को जवाब दिया कि मैं सिर्फ कुंवारा ही नहीं ब्रह्मचारी भी हूँ। दोनो इस बात पर ठहाके लगाकर मुस्कुराने लगे। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव हुआ कलाम को जबरदस्त समर्थन प्राप्त हुआ। 25 जुलाई 2002 को उन्होंने संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। 25 जुलाई 2007 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था।

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