वह देश जहां इस्लाम छोड़ने पर मिलती थी मौत , यातना, शोषण ओर सजा

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भारत:- इस्लाम को लेकर इस समय हमें तरह तरह के बयान सुनने को मिल रहे हैं वही अगर हम भारत की बात करे तो भारत मे इस्लाम के नाम पर कत्लेआम जारी है। मुस्लिम समाज इस्लाम की आड़ में काफी दहशत फैलाए हुए हैं। जो इस्लाम लोगो को जोड़ने ओर एकजुटता का परिचय देता है उसकी आड़ में आज कुछ विशेष लोग देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं ओर इस्लाम को सावालो के घेरे में खड़ा कर दे रहे हैं। 

लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे देश के बारे में जहाँ साल 2020 में 30 साल पुराने इस्लामी शासन का अंत हुआ है ओर वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया गया है। हम बात कर रहे हैं उत्तरी अफ्रीकी देश सूडान की जहाँ 30 साल पुराने इस्लामी कानून को लोगो ने नकार दिया था ओर यहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू की गई। सरकार ने कहा कि वह धर्म को इस्लाम से अलग रखेगी। 
लेकिन यहां अब तक कट्टरपंथियों का दबदबा रहा है। वही जो लोग इस्लाम के खिलाफ हुए ओर जिन्होंने इस्लाम को छोड़ने का विचार किया उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। यहां के कई मामले सोशल मीडिया पर देखने को मिले जिनमे इस्लाम का विरोध करने वाले लोगो को पत्थर मार मार कर मौत के घाट उतार दिया गया।

जाने कैसे सूडान बना इस्लामी:-

साल 1989 में सैन्य शासक उमर अल बशीर (Omar al-Bashir) ने सूडान पर कब्जा कर लिया था। जब उमर अली बशीर ने सूडान पर कब्जा किया तो सूडान का इस्लामीकरण हो गया। यहाँ दूसरे धर्म के लोगो को अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया। जो लोग इसके विरोध में खड़े हुए उन्हें कड़ी सजा दी गई उनपर अत्याचार हुए। लेकिन साल 2019 में सैन्य शासक बशीर पर गम्भीर आरोप लगे। उनपर कई मुकदमे चलाए गए मासूमो की जान लेने की तहरीरें दर्ज हुई। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में बशीर पर नरसंहारों का आरोप भी लगा। इन आरोपो के बाद बशीर को 2019 में अपदस्थ किया गया था और शासन की कमान सेना ने ले ली थी। लेकिन साल 2020 में सैन्य शासन खत्म होकर लोकतंत्र की बहाली होने का विचार किया गया। 3 सितंबर को हुई इस बात के बाद सूडान में हिंसा थमने की उम्मीद जताई जाने लगी। लेकिन अब यहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था है।
जानकारी के लिए बता दें सूडान में कई संगठन बन चुके हैं, जो अल बशीर के इस्लामिक शासन के खिलाफ रहे. वे लोकतंत्र की मांग के लिए पूर्व सरकार और सेना से लड़ाई करते रहे. यही वजह रही कि सूडान को अफ्रीका के कुछ सबसे ज्यादा हिंसाग्रस्त देशों में गिना जाता रहा।

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