भारत:- भारत की बढ़ती जनंसख्या को लेकर अभी हाल ही के संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट आई है इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि साल 2023 तक भारत की जनसंख्या चीन की जनसंख्या से अधिक होगी। रिपोर्ट के सामने आते ही इस मामले पर राजनेताओं के बयान सामने आने लगे हैं। कोई देश की बढ़ती जनंसख्या को वर्ग विशेष से जोड़ रहा है तो कोई इसे भारत के लिए चिंता का विषय बता रहा है। वही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बढ़ती जनंसख्या को लेकर कहा कि सिर्फ खाना खाना और जनसंख्या बढाने का काम जानवर करते हैं। मोहन भागवत का यह बयान एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी को बिल्कुल नहीं भाया ओर वह भड़क उठे।
एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी मोहन भागवत के बयान से इतना तिलमिला गए की उन्होंने उन्हें संविधान पढ़ने की सलाह दे डाली। एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने कहा कि देश मे 8 फीसदीं बेरोजगारी है भागवत जनंसख्या पर अपना पक्ष रखते हैं लेकिन वह बेरोजगारी पर अपना मुख नही खोलते। क्यों? उन्होंने कहा कि हमारा देश युवाओं का देश है सरकार को युवाओं के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्हें जनसंख्या पर अपना पक्ष रखकर किसी एक विशेष समुदाय के खिलाफ लोगो को नहीं भड़काना चाहिए ओर यह नफरत का खेल नहीं खेलना चाहिए।
उन्होंने आगे धर्म धर्म परिवर्तन के मुद्दे को उठाया ओर वह बोले कि कि संघ संस्कृति का बात करता है। लेकिन वह यह नही जानते कि हिंदुत्व और भारतीयता एक नहीं है। भारत अलग अलग धर्मो का देश है। अब अगर कोई धर्म बदलना चाहता है तो वह धर्म बदले इसमे किसी को या भागवत को समस्या क्यों है। उन्होंने कहा कि आरएसएस चाहता है कि देश मे एक मजहब एक भाषा हो लेकिन वह यह नहीं जानता कि हमारे देश मे भाषा नहीं भाव आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि संघ अपनी विचारधारा को लोगो पर थोपना चाहती है लेकिन यह सम्भव नही है। क्या दक्षिण की संस्कृति को उत्तर से मिलाया जा सकता है। वही चुनने का अधिकार भारत के संविधान में है। संविधान में साफ लिखा है कि जो समाजिक , आर्थिक, राजनीति रूप से कमजोर है उसे हमे मजबूत बनाना चाहिए। उसे ऊपर उठाने की कोशिश करनी चाहिए। यह भारत के संविधान का सच है जिसे स्वीकार करना ही चाहिए।
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