राजनीति;- एनडीए की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को वैसे तो कई राजनीतिक दल से समर्थन प्राप्त हो रहा है। लेकिन कांग्रेस विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के समर्थन में खड़ी है। कांग्रेस के इस रुख पर कई तरह के बयान आ रहे हैं। लोगो का कहना है कि खुद को पिछडो का हितैषी बताने वाली कांग्रेस एक आदिवासी महिला को समर्थन नही दे रही है। वही अब कांग्रेस के इस व्यवहार पर आचार्य प्रमोद में टिप्पणी की है ओर कहा है द्रौपदी मुर्मू का विरोध करने के बारे में एक बार कांग्रेस को पुनः विचार अवश्य करना चाहिए।
आचार्य प्रमोद ने ट्वीट कर कहा कि प.मोतीलाल नेहरु से लेकर आज तक कांग्रेस हमेशा “शोषित” वंचित और “आदिवासियों” के साथ खड़ी रही है,राष्ट्रपति चुनाव में एक आदिवासी महिला उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू का विरोध करना मेरे “विचार” से बिलकुल उचित नहीं है,पार्टी हाई कमान को इस पर “पुनर्विचार” करना चाहिये। आचार्य के ट्वीट पर लोग जमकर प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।
[object Promise]
एक यूजर आचार्य विनोद पर टिप्पणी करते हुए कहता है कि संत होकर अक्ल घास चरने गया है, भाजपा ऐसे व्यक्ति को बैठाना चाहता है जो स्टाम्प बनकर रह जाय और आप समर्थन कर रहे हैं । आपके नैतिकता को सलाम । वही दूसरा यूजर कहता है कि व्यर्थ ही आप नींद बिगाड़ रहे हैं ,कांग्रेस आलाकमान तो पिछले आठ साल से सो रही है जागृत रहने वाले विचार और पुनर्विचार करते हैं आप भी सो जाइए। एक यूजर कहता है कि महाराज जी, व्यक्तिगत तौर पर आपका बहुत सम्मान है लेकिन राजनीति में आप मुझे RSS के दल्ले लगने लगे हो ! शब्दों के लिए माफी आप इस्तीफा दे दो प्लीज, कांग्रेस छोड़ दो।
जानकारी के लिए बता दें यशवंत सिन्हा ने शिवसेना द्वारा द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कहा है कि उद्धव ठाकरे पर द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने के लिए भाजपा द्वारा दवाब बनाया गया है। वही अगर मैं राष्ट्रपति बन गया तो मैं भाजपा द्वारा लाया गया CAA और NRC कभी लागू नहीं होने दूंगा। मैं व्यक्तिगत तौर पर द्रौपदी मुर्मू का सम्मान करता हूँ लेकिन वह जिस विचारधारा के साथ खड़ी है उसका नहीं। क्या आप ऐसा राष्ट्रपति चाहते हैं जो बोलना न जानता हो।
