शिव और विष्णु पुराण में है अनोखा अंतर

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धर्मिक:- हिन्दू धर्म मे दो प्रकार के ग्रन्थ होते हैं श्रुति और स्मृति। श्रुति के अंतर्गत वेद का जिक्र होता है और स्मृति के अंतर्गत पुराणों का जिक्र है। वही अगर हम पुराणों की बात करे तो कुल पुराणों की संख्या 18 होती है। पुराणों को वेदव्यास ने लिखा है। वही अगर हम सबसे ज्यादा प्रचलित पुराणों की बात करे तो वह शिव पुराण और विष्णु पुराण है। सुनने में यह दोनो एक जैसे लगते हैं और इनके नाम से ऐसा प्रतीक होता है यह अलग अलग प्रकार के रहस्यों से भरे पड़े हैं लेकिन इनमें कुछ मूल अंतर भी है जो इस प्रकार है। 

अगर हम बात शिव पुराण की करे तो यह शिव की महिमा का गुणगान करता है और इसमे शिव के अवतारों का विस्तृत वर्णन किया गया है। वही विष्णु पुराण विष्णु के अवतारों का व्याख्यान करता है और इसमे विष्णु भगवान के विषय मे सम्पूर्ण जानकारी दी गई है। 
अगर हम विष्णु पुराण की तुलना शिव पुराण से करें तो यह काफी शिव पुराण से काफी छोटा है। शिवपुराण का पाठ शिव अनुयायी करते हैं वही विष्णु पुराण का पाठ विष्णु अनुयायी करते हैं।
शिव पुराण को महापुराण के नाम से जाना जाता है लेकिन विष्णु पुराण को कोई अन्य उपनाम नहीं प्राप्त है। विष्णु पुराण में मुख्य रूप से एकादशी व्रत के महत्व से लेकिन गंगा स्नान, तुलसी पूजा , गाय पूजा, श्राद्ध कर्म, तीर्थ परिक्रमा, माता पिता की सेवा आदि का वर्णन किया गया है। वही शिव पुराण में शिव की महिमा , शिव के अवतार, शिव के कार्य, शिव का रौद्र रूप उल्लेखित है। 
विष्णु के विषय मे विख्यात है कि वह पालनहार है जीवन देने वाले हैं इस सृष्टि के संचालक है वही शिव को मृत्यु का देवता कहा गया है यह योगी है वैरागी है और संहारक है। 
शिवपुराण के मुताबिक विष्णु की उत्पत्ति शिव से हुई है जबकि विष्णुपुराण के मुताबिक शिव की उत्पत्ति विष्णु से हुई है। शिव पुराण मूल रूप से द्वैतवाद का समर्थन करता है जबकी विष्णु पुराण अद्वैतवाद का समर्थन करता है।

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