ज्ञानवापी मसजिद में सर्वे का केस पहुंचा सुप्रीमकोर्ट, सर्वे पर लिया ये फैसला !

admin
By admin
3 Min Read

इससे पहले गुरुवार को वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर मामले में  फैसला सुनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि तहखाने से लेकर परिसर के चप्पे-चप्पे का सर्वे किया जाए। जहां ताला लगा है, वहां खुलवाकर या तुड़वाकर वीडियोग्राफी और सर्वे कराया जाए। सर्वे का काम सुबह 8 से 12 बजे तक किया जाए। इस याचिका में वाराणसी कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। वाराणसी कोर्ट ने पूरे ज्ञानवापी मसजिद परिवार का सर्वे और वीडियोग्राफी करवाने का आदेश दिया है। 

ज्ञानवापी विवाद मामले में याचिकाकर्ता अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में कहा है कि 1991 में दाखिल किए गए वाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है।

उस याचिका में भी सर्वेक्षण कराने पर कोर्ट का आदेश भी था। जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। जब स्टे लगा हुआ था तो निचली अदालत में फिर याचिका कैसे आई और निचली अदालत ने फिर से वीडियोग्राफी के साथ सर्वेक्षण कराने का आदेश कैसे दिया?

इस मामले में दोनों याचिकाएं उपासना स्थल कानून 1991 के खिलाफ हैं। इस पर अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने अपने फैसले के जरिए इस कानून पर अपनी मुहर भी लगाई थी।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी मामले में सर्वेक्षण कराने से पहले कमेटी की आपत्तियों पर विचार नहीं किया था।

मंदिर के पैरोकारों ने यह नई याचिका 1991 में दाखिल की गई याचिका को दरकिनार करके दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में यह भी जिक्र किया है कि जब उपासना स्थल कानून की तस्दीक सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी कर दी गई है कि अयोध्या में राम मंदिर के अलावा और कोई उपासना स्थल के स्थिति में बदलाव नहीं किया जाएगा तो वाराणसी की कोर्ट ने यह आदेश कैसे दिया है!

भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई एन वी रमना ने इस याचिका पर कहा है कि पहले इस पूरे मामले की फाइल देखी जाएगी और उसके बाद फैसला लेंगे। सीजेआई ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज और फाइल मांगी है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *