कश्मीर फाइल्स पर बोली GKPD, इतिहास दुखदाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे पढ़ा न जाए

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लखनऊ| विवेक अग्निहोत्री की फ़िल्म द कश्मीर फाइल्स इस समय सुर्खियों में है। भारत का आज ऐसा कोई राज्य नहीं जहाँ इस फ़िल्म की चर्चा न हो। कई राज्यों ने अपने यहां इस फ़िल्म को टैक्स फ्री भी कर दिया है। वही कई राज्य ऐसे भी है जहां इस फ़िल्म के समर्थक इसे टैक्स फ्री करवाने की मांग कर रहे हैं। यह फ़िल्म उन फिल्मों में से एक है जिसकी तारीफ देश के प्रधानमंत्री ने की है। लेकिन इतनी प्रशंशा के बाद भी लोग इस फ़िल्म की लगातार आलोचना कर रहे हैं। वह निर्देशक पर यह आरोप मढ़ रहे हैं कि उन्होंने फिल्म में सिर्फ कश्मीरी पंडितों के पलायन का जिक्र किया है मुस्लिम और सीखो के संघर्ष को फ़िल्म में नकार दिया गया है। वही कई लोग यह भी कह रहे हैं कि इस फ़िल्म में कहानी को तोड़ मरोड़ पर दर्शकों के सम्मुख प्रस्तुत किया गया है। फ़िल्म का उद्देश्य पैसा कमाना और राजनीतिक दृष्टिकोण से जनता को एक विशेष दल की ओर आकर्षित करना है।

अब इस फ़िल्म को लेकर कश्मीरी पंडितों के संगठन ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा ने एक बयान दिया है। उन्होंने अपने बयान में चौकाने वाली बात कही उन्होंने बताया उनकी संस्था 20 देशो में है। उन्होंने विवेक अग्निहोत्री से निवेदन किया था कि वह कश्मीरी पंडितों के दर्द की भयावहता को भारत के लोगो के सामने लाए। इतना ही नहीं विवेक अग्निहोत्री की मुलाकात भी 750 पीड़ितों से करवाई उन्होंने उनकी कहानी सुनी है। GKPD के कोफाउंडर सुरेंद्र कौल ने कहा, हमने कश्मीरी पंडितों के दर्द को देखा है। उनके ऊपर हो रहे अत्याचार को देखकर सरकारी तंत्र से लेकर सब मौन थे। कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की घटना किसी को नहीं मालूम। हम पिछले 10 साल से कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार की कहानी को पर्दे पर उतारना चाह रहे थे। 
वही फ़िल्म की सत्यता का जिक्र करते हुए वह बोले फ़िल्म कश्मीरी पंडितों के साथ हुई बर्बरता का 5 से 10 फीसदी है। यह फ़िल्म सत्य पर बनी हुई है लेकिन वास्तव में सत्य को दिखा पाना कठिन था। इतने कम समय मे सब कुछ नहीं समेटा जा सकता था फ़िल्म में कोई भी पोपोगेंडा नहीं है। वही हिन्दू मुस्लिम विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा इस फ़िल्म को किसी भी व्यक्ति को इस दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए कि यह हिन्दू के लिए बनी हुई है और मुस्लिम द्वारा उनपर अत्याचार हुआ है। बल्कि भारत के सभी नागरिकों को यह फ़िल्म इस उद्देश्य से देखनी चाहिए कि भारत के नागरिकों के साथ कितना अभद्र व्यवहार हुआ है। फिल्‍म की आलोचना को लेकर GKPD ने अपनी चुप्पी तोड़ी ओर कहा यह गलत है इतिहास कष्टदायक रहा है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि उसे पढ़ा ही न जाए। कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने इस फ़िल्म को टैक्स फ्री किया उनको शुक्रिया वही अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री से निवेदन है कि वह अपने राज्य में फ़िल्म को टैक्स फ्री करें।

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