जयपुर। शिवदासपुरा के पास बरखेड़ा तालाब पर बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें बर्ड वॉचिंग के कई विशेषज्ञों ने आमजन को विभिन्न पक्षियों की पहचान कराई तथा पारिस्थितिकी के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
जिसमें आमजन को फ्लेमिंगो, कोरमोरेंट, लिटिल ग्रीव, स्पू्नबिल, आइबिस, नॉर्दन सावलर, लिटिल रिंग फ्लावर, कॉमन व पाइड किंगफिशर, रफ, गॉड विट, पेंटेड स्टोर्क सहित विभिन्न यूरोपीय देशों से आए हुए प्रवासी पक्षियों को देखने तथा उनके बारे में विशेषज्ञों से जानकारी लेने का अवसर मिला।
नम भूमि में आने वाली विभिन्न समस्याओं, पंछियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और झीलों को बचाने के वांछनीय प्रयासों के बारे में भी प्रतिभागियों एवं ग्रामवासियों द्वारा चर्चा की गई जिसके दौरान स्पष्ट हुआ कि बरखेड़ा के इस तालाब में पानी में गंदगी आने की काफी बड़ी समस्या है । पूर्व में आने वाले पानी के कई रास्ते आवासीय कारणों से अवरुद्ध हो गए हैं जिससे स्वच्छ पानी की बजाए अब अधिकांशत सीवरेज का पानी आता है और पानी की कुल मात्रा में भी यहां कमी आई है । और तालाब में मछलियों के ठेके होने से पंछियों के भोजन में भी कमी हो रही है। ग्राम वासियों ने चर्चा के दौरान यह स्पष्ट किया कि वह इन पंछियों के आसन आश्रय स्थलों को बचाना चाहते हैं जिससे अधिक से अधिक मात्रा में यहां पर पंछी आते रहे।
राजस्थान वानिकी एवं वन्य जीव प्रशिक्षण संस्थान जयपुर के निदेशक प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. एन.सी. जैन ने इस अवसर पर संभागीय को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण को लेकर यदि किसी क्षेत्र की कुल आबादी के मात्र 0.1 प्रतिशत लोग भी एक्टिव हो जाएं तो बहुत बड़ा परिवर्तन आ सकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे किसी भी रूप में प्रकृति संरक्षण से जुड़ें। उन्होंने स्थानीय ग्राम वासियों को बर्डवाचिंग के बारे में वानिकी प्रशिक्षण संस्थान की ओर से व्यवस्था करने का आश्वासन दिया जिससे ग्रामवासी अपने नम भूमि और पंछियों की अधिक जानकारी प्राप्त कर इसके संरक्षण से जुड़ सकें। जिसे स्थानीय निवासियों ने नई पहल बताते हुए स्वागत किया।
कार्यक्रम में जयपुर और आसपास से बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी तथा आमजन आए एवं उन्होंने सामुदायिक भावना से श्रमदान के द्वारा जिलों की सफाई एवं व्यवस्था में भी सहयोग करने का आश्वासन दिया आने वाले महीने में महीने भर में जब तक सुदूर देशों से आए हुए प्रवासी पंछी जयपुर के आसपास की जिलों में उपलब्ध रहते हैं तब तक प्रत्येक वीकेंड पर इस तरह के और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे इससे अधिक से अधिक प्रकृति प्रेमियों को नम भूमि संरक्षण की आवश्यकता से जोड़ा जा सके।
