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राष्ट्रीय 15 August 2026• 10:03 AM

Brij Bhushan Case: महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बृज भूषण दोषमुक्त, फैसले पर उठे सवाल

Brij Bhushan Case: बृज भूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया है। महिला पहलवान ने फैसले के खिलाफ अपील की बात कही।

Priyanshi Singh

15 August 2026

Brij Bhushan Case: महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बृज भूषण दोषमुक्त, फैसले पर उठे सवाल

Brij Bhushan Case: बृज भूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया है। महिला पहलवान ने फैसले के खिलाफ अपील की बात कही।

नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी नेता बृज भूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया है। हालांकि, अदालत के 244 पन्नों के फैसले को अभी तक कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया गया है। मामले से जुड़ी एक महिला पहलवान ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

बृज भूषण शरण सिंह पर छह महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद 2023 में पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक धरना प्रदर्शन किया था और बृज भूषण के इस्तीफे तथा गिरफ्तारी की मांग की थी।

3 अगस्त को सुनाया गया फैसला

अदालत ने अपना फैसला 3 अगस्त को सुनाया था और इसकी प्रति 10 अगस्त को दोनों पक्षों के वकीलों को उपलब्ध कराई गई। हालांकि, फैसले को दिल्ली जिला अदालत की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है।

मामले से जुड़े दोनों पक्षों के वकीलों के मुताबिक, उनसे एक अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर करवाए गए हैं, जिसके तहत अदालत के आदेश को संबंधित पक्षों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गई है।

अभियोजन पक्ष की वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने फैसले को सार्वजनिक नहीं किए जाने को असामान्य बताया। उनका कहना है कि अदालत के फैसले सार्वजनिक दस्तावेज होते हैं और पीड़ितों की पहचान से जुड़ी जानकारी को हटाने के बाद उन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है।

किन धाराओं में बरी हुए बृज भूषण?

बृज भूषण शरण सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354A, 354D और 506 के तहत लगे आरोपों से बरी किया गया है। वहीं, भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व महासचिव विनोद तोमर को धारा 506(1) के मामले में दोषमुक्त किया गया है।

मीडिया संस्थानों द्वारा देखी गई फैसले की प्रति के अनुसार, मजिस्ट्रेट अश्विन पंवार ने अभियोजन पक्ष के मामले में गंभीर कमियों और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का उल्लेख किया।

अदालत ने शिकायतों में कथित देरी, कुछ बयानों में बदलाव और गवाहों के बयानों में असंगतियों को भी फैसले में महत्वपूर्ण माना।

फैसले पर उठे सवाल

अभियोजन पक्ष की वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने अदालत के निष्कर्षों पर असहमति जताते हुए कहा कि पीड़ितों और चश्मदीद गवाहों की विस्तृत गवाही को मामूली तारीख संबंधी गलतियों के आधार पर खारिज करना उचित नहीं है। उन्होंने फैसले को चुनौती दिए जाने की बात कही।

वहीं, बृज भूषण के वकील राजीव मोहन ने कहा कि अभियोजन पक्ष के बयानों में विरोधाभास थे और शिकायतों में हुई देरी को भी अदालत ने संज्ञान में लिया।

संवैधानिक सवालों पर भी बहस

लीगल थिंक टैंक विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी से जुड़े स्वप्निल त्रिपाठी ने फैसले को सार्वजनिक किए जाने पर रोक को लेकर संवैधानिक सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि न्यायिक कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें हैं।

हालांकि, यौन अपराधों के मामलों में पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में अदालतें पहचान छिपाने और आवश्यक जानकारी को सार्वजनिक रिकॉर्ड से हटाने जैसे उपाय कर सकती हैं।

महिला पहलवान करेंगी अपील

फैसले के बाद मामले की एक महिला शिकायतकर्ता ने इसे चुनौती देने की बात कही है। ऐसे में बृज भूषण शरण सिंह को बरी किए जाने का फैसला आगे उच्च अदालत में कानूनी समीक्षा के दायरे में आ सकता है।

मामला 2023 में देशभर में चर्चा में आया था, जब शीर्ष महिला पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। अब ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में है।

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