उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के महानगर इलाके में साइबर ठगों ने परिवहन विभाग के एक रिटायर्ड रीजनल मैनेजर को पुलवामा आतंकी हमले और टेरर फंडिंग के झूठे मामले में फंसाने का डर दिखाकर करीब 19 लाख रुपये ठग लिए हैं। रविवार (13 सितंबर 2026) को सामने आई इस वारदात में जालसाजों ने पीड़ित को मुंबई में उनके आधार कार्ड से फर्जी सिम और बैंक खाता खोलने का दावा किया था। ठगों ने पीड़ित को डराया कि उनके खाते में पाकिस्तान से 2.50 करोड़ रुपये आए हैं, जिसका संबंध सीधे तौर पर आतंकवाद की फंडिंग से है।
आधार कार्ड के जरिए फर्जी सिम और बैंक खाते का दिखाया डर
आजतक के संतोष शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के महानगर इलाके के रहने वाले परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) रीजनल मैनेजर के पास 1 सितंबर 2026 को एक अज्ञात फोन आया। फोन करने वाले ने खुद का नाम सुरेश म्हात्रे बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का दुरुपयोग करके मुंबई में एक मोबाइल सिम खरीदा गया है और उसी सिम के माध्यम से मुंबई के ही एक बैंक में खाता भी खोल लिया गया है। इसके बाद पीड़ित को डराने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का सिलसिला शुरू हुआ।
ठगों ने डराया कि उनके नाम से खुले इस बैंक खाते में पाकिस्तान से 2.50 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं, जिसमें से 25 लाख रुपये कमीशन के रूप में मिले हैं। जालसाजों ने दावा किया कि इस टेरर फंडिंग (आतंकवाद के वित्तपोषण) के सिलसिले में एक आतंकवादी पकड़ा गया है और जांच एजेंसियां पीड़ित के खाते से हुए संदिग्ध लेनदेन की जांच कर रही हैं। आरोपियों ने उन्हें पुलवामा आतंकी हमले का नाम लेकर डराया कि यदि वे जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वर्दी पहनकर डीजीपी और सीबीआई डायरेक्टर बनकर की वीडियो कॉल
पीड़ित को पूरी तरह से अपने जाल में फंसाने के लिए जालसाजों ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया। वीडियो कॉल के दौरान पुलिस की वर्दी पहने हुए एक व्यक्ति भी दिखाई दिया। इसके बाद, फोन करने वाले ने पीड़ित की बात कथित तौर पर महाराष्ट्र के डीजीपी से कराने का नाटक किया। पीड़ित को डराया गया कि उनके खिलाफ पहले से ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है।
आरोपियों ने पीड़ित पर इतना मानसिक दबाव बनाया कि उन्होंने पीड़ित को किसी भी अन्य व्यक्ति से इस मामले की चर्चा न करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने यह बात किसी को बताई, तो उनके बच्चों का भविष्य पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। अगले दिन, पीड़ित की वीडियो कॉल पर कथित रूप से सीबीआई (CBI) डायरेक्टर से बात कराने का दावा किया गया और 'जांच में सहयोग' के नाम पर उन्हें अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तोड़ने के लिए कहा गया।
एफडी तुड़वाकर तीन बार में ऐंठ लिए 19 लाख रुपये
दहशत में आकर रिटायर्ड अधिकारी ने तुरंत अपनी एफडी तुड़वा दी और जालसाजों द्वारा बताए गए एक बैंक खाते में पहली बार में 9 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी ठगों ने अलग-अलग बहानों से और पैसे भेजने का दबाव बनाया। पीड़ित ने फिर 50 लाख नहीं बल्कि 5 लाख रुपये की एफडी तुड़वाई और वह रकम एक दूसरे खाते में भेज दी। इसके बाद ठगों के कहने पर उनके खाते से फिर से 5 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। इस तरह अलग-अलग किश्तों में आरोपियों ने पीड़ित से कुल 19 लाख रुपये ऐंठ लिए।
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई प्राथमिकी
लगातार पैसे ट्रांसफर करने के बाद जब पीड़ित को अपने साथ हुई इस बड़ी ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। यह मामला अब लखनऊ के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में पहुंच चुका है, जहां पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और वीडियो कॉल के लिए इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यमों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि जालसाजों का पता लगाया जा सके।
FAQ:
Q1: लखनऊ के महानगर इलाके में रिटायर्ड अधिकारी के साथ किस तरह की साइबर ठगी हुई है?
A1: जालसाजों ने पीड़ित को फोन कर डराया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर मुंबई में फर्जी मोबाइल सिम और बैंक खाता खोला गया है। ठगों ने दावा किया कि इस खाते में पाकिस्तान से 2.50 करोड़ रुपये की टेरर फंडिंग आई है, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाकर 19 लाख रुपये ठग लिए।
Q2: जालसाजों ने पीड़ित को डराने के लिए किन-किन पहचानों का इस्तेमाल किया?
A2: ठगों ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया और पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की। इसके अलावा उन्होंने पीड़ित की बात कथित तौर पर महाराष्ट्र के डीजीपी और अगले दिन सीबीआई (CBI) डायरेक्टर से कराने का नाटक किया।
Q3: ठगी का शिकार होने के बाद पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
A3: पीड़ित की शिकायत के आधार पर लखनऊ के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और वीडियो कॉल के डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है जिसके जरिए ठगी की गई।



