सरकारी स्कूल के छात्रों पर भी फीस का बोझ, शाला विकास समिति और खेल तक के नाम पर 2 लाख से अधिक अवैध वसूली

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हसौद

निजी स्कूलों में फीस वसूली से प्रेरणा लेकर सरकारी स्कूलों ने भी छात्रों पर फीस के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इनके द्वारा छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने के कई रास्ते निकाल लिए हैं।शाला विकास समिति के नाम पर या खेलकूद, स्काउट, साइंस, रेडक्रास फंड, परीक्षा और नामांकन वगैरह के लिए 900-950 रुपए लिया जा रहा है। 

सरकारी स्कूलों में बच्चों का प्रवेश प्रारंभ हो चुका है,जिसमें शासन के निर्देशानुसार  प्रवेश लेना है लेकिन जैजैपुर विकासखण्ड अंर्तगत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हसौद में प्रवेश के नाम पर प्राचार्य, शिक्षकों द्वारा अवैध रूप से फीस कि वसूली कि जा रही है,अभी तक लगभग 2 लाख रुपये से अधिक का वसूली प्रभारी प्राचार्य अरुण कुमार जायसवाल द्वारा किया जा चुका है।। 

जबकि शासन का स्पष्ट निर्देश हैं कि अभी 9 वीं,11 वीं का  निःशुल्क प्रवेश लेना है व 10वीं-12वीं का 380-415 रुपये ही फीस लेना है। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक के प्राचार्य अरुण कुमार जायसवाल के द्वारा नवमीं से बारहवीं तक यानी आमतौर से हायर सेकंडरी के छात्रों पर ही आर्थिक बोझ डाला गया है, प्राचार्य द्वारा ऊंची कक्षाओं के छात्रों से अलग-अलग तरह के शुल्क लिए जा रहे हैं, अगर बच्चे फीस नहीं देते हैं तो नाम काटने की धमकी दी जाती हैं।

इस संबंध में कुछ छात्रों के अभिभावकों ने चर्चा में बताया कि एडमिशन के बाद अब यह फीस ली गई है। इसमें परीक्षा व नामांकन शुल्क के अलावा शाला विकास समिति, गरीब छात्र, साइंस, स्काउंट, रेडक्रास समेत अन्य शुल्क शामिल हैं। स्कूल का प्रबंधन उनसे साफ कह रहा है कि फीस देनी होगी अन्यथा आगे की पढ़ाई नहीं हो पाएगी, कोरोना काल में काम धंधे बंद है खाने के लाले है और फीस कि जबरन वसुली जले में नमक छिड़कना है लेकिन बच्चों के भविष्य कि चींता के कारण मजबूरी में पैसा देना पड़ रहा है।गौरतलब है कि ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों में अधिकांश छात्र निम्न वर्ग से आते हैं। कोरोना के दौर में जहां कई परिजन आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों से उन पर पड़नेवाला फीस का दबाव भारी पड़ रहा हैं।

प्राचार्य व जनभागीदारी अध्यक्ष मामले को दबाने में जुटे

वहीं पूरे मामले में जब हमने प्राचार्य अरुण कुमार जायसवाल से बात कि तो शाला विकास समिति के साथ बैठक कर शिक्षकों कि कमी को दूर करने के लिए शासन से निर्धारित फीस 380-415रुपये से अधिक 900 व 950 रूपये फीस वसूलने कि बात कहीं,उनके द्वारा यह राशि अधिकारी को बताया बिना ही वसूली किया गया है। 

वहीं जब मामले का उजागर हुआ तो प्राचार्य अरुण कुमार जायसवाल व जनभागीदारी अध्यक्ष मनबोध साहू पूरे मामले को दबाने में जुट गये हैं,आज ही तुरंत उनके द्वारा कागजी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए आनन-फानन में अधिकारीयों के बिना जानकारी में ही विकेसी निकालकर मामले को दबाने कि कोशिश कर रहे हैं। 

अब देखना होगा कि आगे पूरे मामले में अधिकारियों द्वारा किस प्रकार की कार्यवाही की जाएगी या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।विघालय में अधिक फीस वसूली कि जानकारी आपके माध्यम से मिली हैं,प्राचार्य से मैं जानकारी लेती हूं

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