दुर्घटना ग्रस्त रक्त रंजित गरीब मरीज यदि स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के लिए आ जाय तो स्टोर रुम उप्लब्ध होने के बावजूद रक्त प्रवाह रोकने के लिए तत्कालिक आकस्मिक उपयोग में आनेवाले ईजेक्शन लगाने के लिए तुरंत उनके परिजनों को बाहर की दवाईया लाने विवस होना पड़ता है पैसा ना होने के अभाव में कई मरीज काल के गाल में समा जाते हैं, साधारण मामलो मे भी जिला चिकित्सालय जाने के लिए सलाह दी जाती है, लेट लतिफी के चलते नतीजतन गरीब रस्ते मे ही दम तोड़ देते हैं,
इस कारण कई लोगों का विस्वास शासकीय व्यवस्था से उठने मे समय नही लगेगा। कमिसनखोरी के चक्कर में स्वास्थ्य कर्मी इतने मसगूल हो चुके हैं की दवाईयों की हेरा फेरी चरम सीमा पर है जिसका फायदा झोलछाप डॉक्टरों को आसानी से संरक्षण प्राप्त हो जाता है, जिससे गरीबो आम आदमींयो का आर्थिक व मानसिक रूप से शोसड़ हो रहा हैं।
