सुरेंद्र दुबे की पांचवी स्मरण तिथि के उपलक्ष्य में सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन

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 राजस्थान।

केकड़ी नगरपालिका रंगमंच (केकड़ी राजस्थान) में सुरेन्द्र दुबे स्मृति संस्थान की ओर से विश्वविख्यात हास्य कवि एवं संवेदनशील गीतकार सुरेंद्र दुबे की पांचवी स्मरण तिथि के उपलक्ष्य में सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। केकड़ी एवं आसपास के सैकड़ों श्रोताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भव्य बना दिया।सुरेंद्र दुबे स्मृति सम्मान 2023 सेप्रसिद्ध कवि एवं मंच संचालक पंडित सत्यनारायण सत्तन को सम्मानित करते हुए  एक लाख, ग्यारह हजार, एक सौ ग्यारह रुपए की राशि का चेक, प्रशस्ति पत्र एवं अलंकरण भेंट किए गए। मुख्य अतिथि  राजस्थान के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं विधायक डॉ रघु शर्मा थे।

अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष कमलेश साहू ने की। धरोहर प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीकम चंद बोहरा, तहसीलदार राम कल्याण मीणा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सुरेन्द्र दुबे स्मृति संस्थान के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश दुबे सहित दुबे परिवार से आनंदी  दुबे , अविनाश दुबे, अनिरुद्ध दुबे आदि की उपस्थिति ने समारोह को आत्मीय बना दिया।साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत कवि कैलाश मंडेला ने सुरेंद्र दुबे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय देते हुए उनकी स्मृति में स्मारक बनाने की मांग की। मंच संचालक पत्रकार सुरेंद्र जोशी ने केकड़ी शहर के किसी मार्ग या चौराहे का  नामकरण सुरेन्द्र दुबे जी के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा।

मुख्य अतिथि रघु शर्मा ने इसके लिए सकारात्मक प्रयास करने का भरोसा दिलाया।सम्मान समारोह के पश्चात देर रात तक चले कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कर आयोजन को यादगार बना दिया।कवि सम्मेलन का उत्कृष्ट संचालन नई दिल्ली की अन्तरराष्ट्रीय कवयित्री एवं प्रसिद्ध मंच संचालिका डॉ कीर्ति काले ने किया।

सम्मेलन का शुभारंभ युवा गीतकार ईशान दुबे ने सुरेन्द्र दुबे द्वारा रचित सरस्वती वंदना से किया –

हे माँ वाणी जग कल्याणी,सुर नर मुनि सब गुण गाते

जीवन धन्य समझते अपना जब तेरे दर्शन पाते 

प्रथम कवि जयपुर के गजेन्द्र कविया ने राजस्थानी हास्य रचना प्रस्तुत की।तत्पश्चात युवा गीतकार ईशान दुबे ने श्री राम और माँ सीता के बीच हुए संवाद को गीत में प्रस्तुत कर कवि सम्मेलन को गरिमा प्रदान की-

जानकी ने कहा सौम्य श्रीराम से, मैं भी वन में चलूंगी आपके साथ में

शक्करगढ़ से आए हास्य कवि राजकुमार बादल ने अपनी रचनाओं से हंसा हंसा कर लोटपोट कर दिया।

तूने कैसी जाळ बिछाई

मेरे पिया जी की मूँछ कटाई 

कवि कैलाश मंडेला ने  दो हजार के नोट पर लिखी ताजा पैरोडी से वातावरण को उन्मुक्त कर दिया –

जिसका रंग गुलाबी मनभावन लगता था सबको प्यारा

दो हजार का नोट हमारा 

औरैया उत्तर प्रदेश से आए वीर रस के प्रसिद्ध कवि अजय अंजाम ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत कर उपस्थित सभी श्रोताओं को रोमांचित कर दिया –

भारत की माटी का वंदन अनेक बार

चंदन समान इसे माथे लगाता हूं

वीर रजपूतो की वसुंधरा वो वीरभूमि

रंगीले राजस्थान को मस्तक झुकाता हूं

राजा मेवाड़ के प्रताप महाराणा,उन्हें

श्रद्धा की शौर्य शब्द समिधा चढ़ाता हूँ

तालियों की गूंज से हौसला बढ़ा दो आप

चेतक की टापों की गूंज  सुनवाता हूं

इनके अलावा वरिष्ठ शायर कुंवर जावेद की पंक्तियों को भरपूर सराहा गया –

हमारी माता ने कुछ दिन वहाँ बिताए थे

तभी तो नाम से पहले श्री लगाना पड़ा 

करोली के कवि प्रहलाद चांडक  ने कहा –

चेतना में शील का यदि चित्र नहीं है 

सब व्यर्थ है मानव में यदि चरित्र नहीं है

वरिष्ठ गीतकार सत्येंद्र मंडेला ने पीले रंग की महिमा का वर्णन करते हुए अच्छा गीत पढ़ा –

पीळो रंग तो इस जगती मे मान बढ़ावे जी।

अंतरराष्ट्रीय कवयित्री एवं मंच संचालिका डॉक्टर कीर्ति काले नई दिल्ली ने 

अयोध्या में अगर ढूंढोगे तो श्रीराम मिलते हैं 

जो वृंदावन में ढूंढोगे तो फिर घनश्याम मिलते हैं 

अगर काशी में ढूंढोगे तो भोलेनाथ मिल जाएँ 

मगर मां बाप के चरणों में चारो धाम मिलते हैं 

एवं गंगा जी के महत्व पर प्रस्तुत किए गए गीत ने कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान कीं। 

वरिष्ठ कवि इंदौर के पंडित सत्यनारायण सत्तन ने राष्ट्र और धर्म से जुड़ी अपने श्रेष्ठ रचनाओं से आयोजन को गरिमामय बना दिया –

दान की कमाई पर जीते हैं अपाहिज लोग 

तुम मुझे मान की कमाई पर जीने दो 

राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीकमचंद बोहरा ने अपनी कविता में माँ के महत्व को रेखांकित किया। 

कवि सम्मेलन के पश्चात संस्थान के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश दुबे ने उपस्थित सभी का आभार प्रकट किया।

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