कानपुर, नागरिकता संशोधन काूनन (सीएए) को लेकर नगर में हुए बवाल को लेकर शहर के 11 थानों में दर्ज 21 मुकदमों में चार्जशीट लग चुकी है। इनमें आरोपित 24 हजार से अधिक लोगों में से पुलिस सिर्फ 103 को ही जेल भेज सकी जबकि कई लोगों के नाम जांच में ही निकाल दिए गए। करीब एक साल पहले हुए बवाल के बाद दर्ज मुकदमों में 62 ज्ञात आरोपित थे और 138 आरोपित प्रकाश में आए। जांच में पुलिस ने ज्ञात व प्रकाश में आए 62 आरोपितों को क्लीनचिट दे दी।
खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने शहर से पीएफआइ के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इन लोगों के बैंक अकाउंट से हिंसा प्रायोजित करने के लिए लेनदेन का खुलासा हुआ था। पुलिस ने बजरिया के रामबाग कालोनी निवासी मो.उमर, लेबर कालोनी फहीमाबाद निवासी सैयर अब्दुल हई हाशमी, बादशाहीनाका के कुलीबाजार निवासी फैजान मुमताज, अनवरगंज के बड़ा कुरियाना निवासी वासिफ व सरवर आलम को गिरफ्तार किया था।
सबसे अधिक नामजद आरोपितों को क्लीनचिट कर्नलगंज थाने में दर्ज एक मुकदमे में दी गई। 32 नामजद आरोपितों में से पुलिस ने 27 के नाम निकाल दिए। इसको लेकर तत्कालीन कार्यवाहक थानाप्रभारी पर सवाल उठे। एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि सभी मामलों में चार्जशीट लग चुकी है। आरोपित पाए गए 103 को जेल भेजा गया, जबकि 38 आरोपितों को 41.1 के तहत नोटिस जारी किया गया है।
बाबूपुरवा हिंसा में आरोपित बनाए गए छह आरोपित अभी तक फरार हैं। इन लोगों की फोटोग्राफ तो पुलिस के पास हैं, लेकिन इनके नाम व पते तस्दीक नहीं हो सके हैं। इसीलिए आरोप लगाए जाते रहे हैं कि हिंसा प्रायोजित थी और बाहर से लोगों को बवाल के लिए बुलाया गया था।
इन थानों में दर्ज हुए थे मुकदमे : बेकनगंज, कर्नलगंज, चमनगंज, चकेरी, रेल बाजार, अनवरगंज, बाबूपुरवा, फीलखाना, कोतवाली, बजरिया, ग्वालटोली।
21 लोगों से वसूले 2.38 लाख
यतीमखाना में हुए बवाल में बलवाइयों ने एक टाटा सूमो फूंक दी थी। बलवाइयों पर 2.38 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसे 21 लोगों से वसूला गया। इसी तरह से बाबपुरवा हिंसा में हुई क्षति लगभग पौने दो लाख को भी 14 लोगों से वसूला गया।
एसआइटी जांच पूरी हो तो निकले निष्कर्ष
बाबूपुरवा व यतीमखाना में हुई हिंसा की जांच के लिए शासन ने एसआइटी जांच के आदेश दिए गए थे। यह जांच अब तक समाप्त नहीं हुई है। शुरुआती जांच में कहा गया था कि हिंसा में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ), स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) जैसे कट्टरपंथी संगठनों का हाथ है। एसआइटी को इन तथ्यों पर जांच करनी थी, मगर अब तक जांच पूरी नहीं होने से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका।
पीएफआइ के पांच सदस्य हुए थे गिरफ्तार
खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने शहर से पीएफआइ के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इन लोगों के बैंक अकाउंट से हिंसा प्रायोजित करने के लिए लेनदेन का खुलासा हुआ था। पुलिस ने बजरिया के रामबाग कालोनी निवासी मो.उमर, लेबर कालोनी फहीमाबाद निवासी सैयर अब्दुल हई हाशमी, बादशाहीनाका के कुलीबाजार निवासी फैजान मुमताज, अनवरगंज के बड़ा कुरियाना निवासी वासिफ व सरवर आलम को गिरफ्तार किया था।

