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Home » Blog » पिंजरा तोड़ की दोनों सदस्य जमानत पर बाहर आते ही हत्या के मामले में फिर गिरफ्तार
राष्ट्रीय

पिंजरा तोड़ की दोनों सदस्य जमानत पर बाहर आते ही हत्या के मामले में फिर गिरफ्तार

admin
Last updated: April 17, 2026 2:19 pm
admin
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दिल्ली । उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों को भड़काने के आरोप में पिंजरा तोड़ संगठन की 2 सदस्य देवांगना कालिता और नताशा नरवाल को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फिर गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी उन्हें रविवार (मई 24, 2020) को बेल मिलने के कुछ देर बाद दोबारा हुई। अब उन्हें 2 दिन की हिरासत में लिया गया है। इस संबंध में जफर अब्बास ने ट्वीट करके जानकारी दी है। रविवार को हुई दोनों महिलाओं की गिरफ्तारी किसी हत्या से संबंधित है।
इससे पहले इनके ख़िलाफ़ पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 149, 353, 283, 323,332, 307, 302, 427, 120-b, 188 के तहत मामला दर्ज किया था।
क्राइम ब्रांच की स्पेशल इनवेंस्टिगेशन टीम ने दोनों महिलाओं को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगे और आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया था। पुलिस टीम ने इनकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के लिए कोर्ट से 14 दिनों की पुलिस हिरासत की माँग की थी। मगर, कोर्ट ने हर पक्ष की दलीलें सुनते हुए दोनों महिला सदस्यों को 2 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

इससे पहले पिंजरा तोड़ की दोनों महिला सदस्यों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। इन पर आरोप था कि इन्होंने 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काया और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहा।

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पिंजरा तोड़ की दोनों सदस्य जमानत पर बाहर आते ही हत्या के मामले में फिर गिरफ्तार

लेकिन, रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने यह कहते हुए उन्हें बेल दे दी कि केस फाइल और एफआईआर देखने के बाद यह लगता है कि धारा 353 मेंटेनेबल नहीं लगती है।

उन्होंने कहा कि केस के फैक्ट्स बताते हैं कि आरोपित केवल सीएए और एनआरसी का विरोध कर रही थीं और वे किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थीं। आरोपितों की समाज में अच्छी पकड़ है और वे काफी पढ़ी-लिखी भी हैं। वे पुलिस के साथ जाँच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
कुछ प्रबुद्ध सामाजिक वर्ग के लोगों और ‘पिंजरा तोड़’ जैसे कथित सामाजिक संगठनों के कारण दिल्ली यमुना के आसपास रहने वाले लोग ख़ासी परेशानी में थे। वहाँ के सभी स्थानीय लोग पीड़ित और दुःखी महसूस कर रहे थे। चारों तरफ़ भगदड़ का माहौल था। ये संगठन और कथित प्रबुद्ध जन प्रतिदिन हिंसा भड़काने के काम में लगे रहते थे और उन्होंने ही जाफराबाद मेन रोड को ही जाम करवा दिया था। जिससे राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

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