छत्तीसगढ़ : नहीं बेच सकेंगे विदेशी पटाखे, केंद्रीय एजेंसी के दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने के जारी हुए आदेश

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बिलासपुर। विदेशी पटाखे रखने और उनके बेचने पर रोक लगाने संबंधी नागपुर स्थित राष्ट्रीय विस्फोटक नियंत्रक मुख्यालय के जारी दिशानिर्देश के बाद छत्तीसगढ़ ने अनुकरणीय पहल करते हुए इसे राज्य में सख्ती से लागू कर दिया है। अब व्यवसायियों को लाइसेंस लेने के लिए शपथ पत्र देना होगा कि वे विदेश में निíमत पटाखों की बिक्री नहीं करेंगे और न ही वे ऐसे पटाखों का भंडारण करेंगे। दिशानिर्देश के आधार पर प्रदेश में सभी कलेक्टरों ने कड़ाई से पालन करने का आदेश जारी कर दिया है।

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विदेशी पटाखे बेचने पर रोक लगाने संबंधी नागपुर स्थित राष्ट्रीय विस्फोटक नियंत्रक मुख्यालय के जारी दिशानिर्देश को छत्तीसगढ़ ने सख्ती से लागू कर दिया है। अब राज्‍य के व्यवसायियों को लाइसेंस लेने के लिए हलफनामा देना होगा कि वे विदेश में बने पटाखे नहीं बेचेंगे।

बिलासपुर कलेक्टर डा. सारांश मित्तर ने बताया कि विदेशी पटाखों का स्टाक रखने और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पटाखा व्यवसायियों से इस संबंध में शपथ पत्र मांगा गया है। दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वदेशी जागरण मंच ने भी इस आदेश का कड़ाई से पालन किए जाने का आह्वान किया है। ये सख्ती अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय पहल है। इससे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और चीन को करारी आर्थिक चपत पहुंचेगी। वायु और ध्वनि प्रदूषण से कराह रहे देश को राहत मिलेगी।

गौरतलब है कि चोरी-छिपे देश में बड़ी मात्रा में पहुंचने वाले चीनी पटाखे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। राष्ट्रीय विस्फोटक नियंत्रक ने 18 बिंदुओं पर दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें छठे नंबर पर कहा गया है कि लाइसेंसधारी व्यवसायी विदेश में बने आतिशबाजी को न रखें और न ही उसकी बिक्री करें। कम कीमत और आकर्षक होने के कारण अधिक प्रदूषणकारी होने के बाद भी चीन के पटाखे भारतीय बाजार में छाए रहते हैं। पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन के रायपुर कार्यालय के डिप्टी चीफ कंट्रोलर रामेश्वर बोरकर ने बताया कि नागपुर स्थित मुख्यालय से जारी दिशानिर्देश को राज्य के सभी कलेक्टरों को भेजा गया है। व्यवसायियों का आकलन है कि अकेले छत्तीसगढ़ में ही 60 करोड़ के विदेशी पटाखे बिकते रहे हैं।

विदेशी पटाखों की बिक्री पर लगे प्रतिबंध

स्वदेशी जागरण मंच के प्रांतीय संपर्क प्रमुख सुभ्रवत चाकी का कहना है कि विदेशी पटाखा बेचने पर रोक के निर्देश सराहनीय हैं। इस नियम का कड़ाई के साथ पालन किया जाना चाहिए। राज्य सरकार को आगे आकर प्रभावी कदम उठाने चाहिए। मंच के माध्मय से हम सभी लोगों को स्वदेशी सामानों की खरीदी और उपयोग के लिए लगातार जागरूक कर रहे हैं। पटाखा के थोक और खुदरा व्यापारियों के बीच हम विदेशी पटाखा नहीं बेचने के लिए जन जागरण चलाएंगे।

विदेशी सामानों का हो विरोध

स्वदेशी स्वावलंबन अभियान के प्रांतीय संयोजक अशोक सिंह ने देशहित में विदेशी पटाखों का विरोध करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पटाखा ही नहीं विदेश से आने वाले सभी सामानों का प्रभावी विरोध होना चाहिए। स्वदेशी सामानों को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव प्रयास होने चाहिए।

चीनी पटाखों के आयात पर प्रतिबंध

एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत चीनी पटाखों के आयात पर प्रतिबंध है। इनमें क्लोराइड और परक्लोराइड जैसे रसायन होते हैं जो अत्यंत ही खतरनाक होते हैं। इनमें जरा सी रगड़ विस्फोट को दावत दे सकती है।

बढ़ती तस्करी

  • पटाखा कारोबारियों के अनुसार चीनी पटाखों की तस्करी बांग्लादेश के बंदरगाहों के जरिये होती है।

  • दीपावली के दौरान इन पटाखों को खिलौने या अन्य चीजों के कंटेनरों में छिपाकर भारत लाया जाता है।

नुकसान

एक आकलन के अनुसार चीनी पटाखों के चलाते स्वदेशी उद्योग को हर साल दो हजार करोड़ रुपये से अधिक की चपत पहुंचती है।

क्लोराइड बनाम नाइट्रेट

  • भारतीय पटाखों में इस्तेमाल होने वाले नाइट्रेट की तुलना में क्लोराइड 200 से अधिक डिग्री सेल्सियस तापमान पर पिघलता है। जरा सी रगड़ इनमें विस्फोट की वजह बन सकती है।

  • क्लोराइड, नाइट्रेट से अधिक सस्ता है। नाइट्रेट की तुलना में इसके इस्तेमाल से तैयार पटाखे रंग और प्रभाव में 90 फीसद तक सही पाए जाते हैं।

चीन की सम शीतोष्ण जलवायु इन पटाखों के रखरखाव के अनुकूल है जबकि भारतीय उष्ण कटिबंधीय जलवायु में इनके आग पकड़ने का अधिक खतरा होता है।

खतरनाक हैं चीनी पटाखे

चीन निर्मित पटाखे इस वातावरण को कई गुना ज्यादा प्रदूषित करते हैं। जन स्वास्थ्य के साथ देसी पटाखा उद्योग को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। वजह इनमें इस्तेमाल खराब गुणवत्ता वाले रसायन हैं। भारत बड़े त्योहारों को भुनाने के लिए प्रतिबंध के बावजूद चीनी पटाखों से बाजार पट जाते हैं।