DGCI Give Approval For Breast Cancer Medicine: स्तन कैंसर से निजाद पाना हुआ आसान

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DGCI Give Approval For Breast Cancer Medicine: स्तन कैंसर (Breast Cancer) महिलाओं में होने वाली एक बड़ी समस्या बताई जाती है। वहीं हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार इसका पता देर से चलने के कारण देश में मौत की दर बढ़ रही है। साथ ही कही न कहीं हम इसके इलाज के लिए भी पुर्णतः तैयार नहीं थे। पर अब स्तन कैंसर का समय से इलाज पॉसिबल होगा। साथ ही इसकी दवा भी आसानी से मिल पाएगी।  

बता दें कि दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका इंडिया (AstraZeneca India) ने शुक्रवार (18 अगस्त) को बताया कि, भारत के औषधि महानियंत्रक से स्तन कैंसर के इलाज (Treatment) के लिए अपनी दवा के मार्केटिंग के लिए मंजूरी मिल गई है। साथ ही ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने शुरूआती स्तन कैंसर वाले वयस्क मरीजों के इलाज के लिए एक मोनोथेरेपी के रूप में लिंगपरज़ा (ओलापारीब) को भी मंजूरी दी है यह उनपर होगी जिनका पहले नियोएडजुवेंट या एडजुवेंट कीमोथेरेपी के साथ इलाज किया जा चुका है।

एस्ट्राजेनेका इंडिया ने अपने एक बयान में कहा कि, ये मंजूरी ओलंपिया चरण परीक्षण के परिणामों पर आधारित बताई गई थी, जिसके सुझाव पर ओलापारीब ने कुल आंकड़ों में कई महत्वपूर्ण सुधार भी किए। बता दें कि शुरुआती स्तर के स्तन कैंसर के इलाज के लिए डीसीजीआई की मंजूरी के साथ लिनपरजा को अब अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान, भारत और कई अन्य देशों में भी मंजूरी मिल गई है।

क्या आप जानते हैं कि मौजूदा वक्त में शुरुआती स्तर के स्तन कैंसर में बीआरसीए (स्तन कैंसर जीन) का इलाज करने वाली पहली और एकमात्र मंजूर दी जाने वाली दवा बयँ गई है। वहीं एस्ट्राजेनेका इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर गगनदीप सिंह ने यह कहा, ‘लिनपरजा की नियामक मंजूरी… भारत में कैंसर के इलाज के लिए समग्र समाधान प्रदान करने के लिए प्रोटोकॉल और ​​अनुसंधान में हमारी बढ़ती क्षमताओं को काफी मजबूत भी करती है।’

इस कड़ी में गगनदीप सिंह ने यह भी बताया कि दुनिया भर में सबसे अधिक स्तन कैंसर (Breast Cancer) के निदान किए जाने वाले कैंसर (Cancer) में से एक बयँ चुका है, जिसमें हर साल अनुमानित 23 लाख मरीजों को ठीक (Treatment) किया जा रहा है। भारत में कैंसर जैसे गैर-संचारी रोग (NCD) आज सभी मौतों में से 62 प्रतिशत और समय से पहले होने वाली मौतों का 48 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा, ‘हमारा ऑन्कोलॉजी पोर्टफोलियो पिछले 3 सालों में लगातार 40 से 50 फीसदी से बढ़ रहा है’।

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