दिल्ली:देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में सोमवार को करीब 50,000 किसान जुटे और ‘भारतीय किसान संघ’ (BKS) के बैनर तले इन किसानों ने केंद्र सरकार के सामने अपनी कई माँगें भी रखी और फिर शाम होते-होते वापस अपने खेत और खलिहानों में लौट भी गए।
इस रैली में देश के कई हिस्सों के किसान इकठ्ठा भी हुए थे। वहीं किसानों के मंच पर भारत माता और भगवान बलराम की तस्वीरें भी लगी हुईं थी। और पिछले किसान आंदोलन से विपरीत किसानों का यह जुटान एकदम शांतिपूर्ण ही रहा, यहाँ सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिल्ली पुलिस के अलावा पैरा-मिलिट्री बलों की भी तैनाती भी की गई थी।
जब दिल्ली आए किसानों से पूछा गया कि, आखिर क्या कारण है कि दिल्ली की सरहदों को एक साल तक घेर कर रखने वाले किसानों के पहले वाले आंदोलन में जम कर हिंसा जैसी घटना हुई थी, जबकि ये आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है?
तो मध्य प्रदेश के सीहोर से आए सूरज सिंह ठाकुर ने इसका जवाब देते हुए बताया कि हमारे आंदोलन को किसी सियासी दल की फंडिंग नहीं मिल रहीं है, शायद इसीलिए ये शांतिपूर्ण है। सूरज सिंह ठाकुर ने दावा किया कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में उत्पात मचाने वो उन तथाकथित किसानों को राजनीतिक फंडिंग मिली थी। इसी कड़ी में किसानों ने यह भी कहा कि हम केवल अपना अधिकार माँगने आए हैं, जबकि वो लोग किसानों को बदनाम करने के लिए दिल्ली भी आए थे।
वहीं इन किसानों ने ये भी बताया है कि वो पहले वाले ‘किसान आंदोलन’ में शामिल नहीं हुए थे। साथ ही कुछ का यह कहना है कि महज शुरुआत में ही वो उस आंदोलन के साथ थे पर बाद में आंदोलन के सियासी होने का पता लगते ही वे इससे अलग भी हो गए। इसके साथ ही इन किसानों ने एक स्वर में यह भी कहा कि राकेश टिकैत उनके नेता नहीं हैं और देश के प्रत्येक किसान को वे अपना नेता भी मानते हैं और आपस में विचार-विमर्श करके ही फैसले भी लेते हैं।
‘किसान गर्जना रैली’ में इकठ्ठा हुए किसानों का यह स्पष्ट कहना था कि वे लोग किसी को भी परेशान नहीं करना चाहते, वे बस अपना काम करवाने आए हैं। उनकी केंद्र सरकार से मुख्य तीन माँगें हैं, जिसे लेकर वे दिल्ली में आए हैं।
