कितनी प्रभावी साबित होगी ये वैक्सीन, आगमी लहर के लिए कितना तैयार भारत

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डेस्क। कोरोना की आशंका बढ़ने के साथ ही वैक्सीन की चिंता भी शुरू हो चुकी एम है और यह बेहद जरुरी भी है। किसी भी बीमारी के समय उसकी दवा या दवाओं को लेकर सक्रियता भी स्वाभाविक ही है। वहीं यह खुशी की बात है कि भारत की औषधि नियामक संस्था ने पहली ऐसी वैक्सीन को इस महीने की शुरुआत में ही मंजूरी दी है जिसका प्रयोग बहुत ही आसान है। यह नाक में डाली जाने वाली यह वैक्सीन इंकोवेक कोरोना के खिलाफ भारतीय शस्त्रागार में शामिल सबसे प्रभावी नया हथियार है। 
साथ ही इसका इस्तेमाल अभी खुले तौर पर शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन अब टीकाकरण पर भारत की तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने वयस्कों के लिए बूस्टर डोज के रूप में इसका इस्तेमाल करने को बोला है। साथ ही भारत बायोटेक द्वारा विकसित किए जा रहे इस टीके का लंबे व्यक्त से इंतजार था।
वहीं अगले सप्ताह से भारतीय बाजार में यह टीका उपलब्ध हो जाएगा। और इस टीके का इस्तेमाल सीधे नाक में किया जा सकता है और यह सर्वज्ञात तथ्य है कि कोरोना वायरस का प्रवेश नाक के जरिये ही होता है।
यह बड़ी कामयाबी होगी, अगर यह टीका शरीर के प्रवेश द्वार पर ही वायरस को रोकने में कमियाब रहे। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने संसद को बताया है कि नाक में बस एक बूंद डालने की जरूरत पड़ेगी और यह भी कहा जा रहा है कि इसकी सफलता या इसके प्रयोग से जुड़े आंकड़े स्पष्ट भी नहीं हैं। पहले जिन टीकों को मंजूरी मिली थी, उनके प्रयोग से जुडे़ आंकडे़ भी यहां मौजूद थे। बायोटेक ने अपनी ओर से परीक्षण किए होंगे, लेकिन अब इसके सार्वजनिक प्रयोग पर डॉक्टरों को नजर बनाएं रखनी चाहिए। 
आपको यह भी ध्यान रखना है कि विश्व के इस लगभग पहले ‘नेजल’ टीके को दुनिया के दूसरे देश या विश्व स्वास्थ्य संगठन तभी मंजूर करेगा जब इसके प्रयोग संबंधी पर्याप्त आंकडे़ हमारे पास मौजूद होंगे। वहीं सरकार को अपनी ओर से सावधान भी रहना चाहिए, किसी भी दवा को आजमाने के बाद ही या अपनी कड़ी निगरानी में इसे प्रयोग में आने दें। वहीं अगर भारत अपने इस टीके को सफल सिद्ध करके दिखाए, तो यह हमारे पूरे दवा उद्योग के लिए बहुत अच्छी बात साबित होगी। दुनिया वैक्सीन के मामले में लगभग ठहर गई है, जो तेजी शुरुआत में दिखी थी, वह कोरोना के काबू में आने के बाद से ही थोड़ी सुस्त पड़ी है। 
वहीं किसी भी वैक्सीन का विकास या निर्माण एक लंबी अवधि की प्रक्रिया है। साथ ही भारत में भी टीकाकरण की रफ्तार धीमी पड़ी है। करीब 94 करोड़ वयस्कों में से लगभग 71.90 करोड़ ने अभी तक बूस्टर डोज ही नहीं लिया है और लगभग 7.5 करोड़ वयस्कों ने अपनी दूसरी खुराक भी नहीं लगवाई है। पहली खुराक लेकर ही लोग खुद को सुरक्षित मान रहे हैं और अभी भी कई लोग यह मानते हैं कि बूस्टर डोज से कोई लाभ नहीं है। 

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