ABHI-ABHI : तीसरी लहर ने आते ही मचाया तांडव, सैकड़ों बच्चों ने तोड़ा दम

admin
By admin
5 Min Read

जकार्ता। इंडोनेशिया में सैकड़ों बच्चे पिछले कुछ हफ्तों में कोरोनावायरस से मर चुके हैं, उनमें से कई बच्चों की उम्र पांच साल है तो कुछ की उम्र 7 साल। बच्चों की मौत के बाद इंडोनेशिया की स्थिति काफी ज्यादा विकराल हो गई है। मां-बाप अपने बच्चों को आखिरी बार देख तक नहीं पा रहे हैं। डॉक्टरों ने कहा है कि इंडोनेशिया में बच्चों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों में इंडोनेशिया में सैकड़ों बच्चों की मौत इस जानलेवा वायरस की वजह से हो गई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर हफ्ते सौ से ज्यादा बच्चों की मौत हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे डेल्टा वेरिएंट के शिकार बन रहे हैं और अब तक 800 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है, जबकि शुक्रवार को इंडोनेशिया में 50 हजार से ज्यादा कोरोना वायरस के केस मिले हैं और 1566 लोगों की मौत हुई है। इंडोनेशिया के डॉक्टर्स के मुताबिक, कोरोना वायरस इस बार खास तौर पर बच्चों को निशाना बना रहा है और करीब साढ़े 12 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं।

इंडोनेशिया स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 12 जुलाई बच्चों के लिए सबसे बड़ा काल बनकर आया था और उस दिन देश में करीब 150 से ज्यादा बच्चों की मौत कोरोना वायरस की वजह से हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले ज्यादातर बच्चों की उम्र पांच साल से कम है। आपको बता दें कि इंडोनेशिया में डेल्टा वेरिएंट भारत जैसी तबाही ही मचा रहा है और वहां के अस्पताल भी पूरी तरह से भरे हुए हैं। वहीं, ऑक्सीजन संकट की वजह से भी कई लोगों की मौत हो चुकी है।

महामारी की शुरुआत के बाद से इंडोनेशिया में 18 साल से कम उम्र के 800 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। लेकिन इनमें से ज्यादातर मौतें पिछले दो महीने में हुई हैं। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चों की मौत के पीछे कई वजहे हैं और सबसे बड़ी वजह ये है कि मरने वाले बच्चे कमजोर थे। वहीं, इंडोनेशिया में इम्यूनिटी का प्रतिशत कम होने की वजह से भी बच्चों की मौत हो रही है। वहीं, अभी तक इंडोनेशिया में सिर्फ 16 प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन की डोज दी गई है, जबकि सिर्फ 6 प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन की दोनों खुराक दी गई है।

इस महीने की शुरुआत में कोविड -19 के हर दिन दर्ज होने वाले मामले को लेकर इंडोनेशिया ने ब्राजील और भारत को पीछे छोड़ दिया है और इसके साथ ही इंडोनेशिया नया एपिसेंटर बन गया है। इंडोनेशिया में मृत्युदर भी भारत की तुलना में ज्यादा है। रविवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने 2 अगस्त तक के लिए प्रतिबंधों को ढीला कर दिया है, जिसके बाद उनकी काफी आलोचना की जा रही है। इंडोनेशिया में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं और बच्चों की मौत हो रही है, उसके बाद भी कोविड प्रतिबंधों को हल्का कर देने का फैसला सबकी समझ से परे की बात है। राष्ट्रपति के आदेश के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्थिति काफी ज्यादा भयावह हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इंडोनेशिया सरकार से देश में सख्त लॉकडाउन लगाने की अपील की है और चेतावनी दी है अगर कोविड का ग्राफ रोका नहीं गया, तो ये वायरस देश में काफी तबाही मचा सकता है। ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफ़िथ विश्वविद्यालय में इंडोनेशिया के महामारी विज्ञानी डिकी बुडिमन ने रविवार को समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि, ‘प्रतिबंध कम से कम चार हफ्तों के लिए और होना चाहिए और सरकार को चाहिए कि इस बीच टेस्टिंग और ट्रेसिंग को काफी तेजी से बढ़ाए, ताकि लोगों को मरने से बचाया जा सके। और अगर ऐसा नहीं किया गया तो फिर कुछ फायदा नहीं होने वाला है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *