जाने कहां से आया लंपी स्किन डिजीज, क्या संक्रमित गाय का दूध किया जा सकता है इस्तेमाल

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देश: भारत मे इस समय लंपी स्किन डिजीज का तांडव मचा हुआ है। बिहार, राजस्थान, गुजरात व उत्तरप्रदेश में इस वायरस की दस्तक हो चुकी है। यह वायरस दुधारू पशुओं पर अपना प्रकोप डाल रहा है। जानवर इसके दर्द से कराह रहे हैं। हजारों गाय इस वायरस की चपेट में आकर मर चुकी है। 

यह बीमारी गायों के लिये जानलेवा बन गई है। इसमे पहले उनके शरीर पर गांठे बनती है फिर उन्हें बुखार आता है और गाय परेशान होकर दर्द में कराह कर मर जाती है। लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर इस खतरनाक वायरस का जन्म कहा से हुआ और यह भारत में आया कैसे? वही पीड़ित पशुओं के दूध का सेवन क्या मनुष्य कर सकता है क्या यह नुकसानदेह नही है।

जाने क्या है लंपी स्किन डिजीज:

लंपी स्किन डिजीज एक स्किन वायरस है यह पॉक्स परिवार का वायरस है। यह एक अफ्रीकी बीमारी है इसकी शुरुआत जाम्बिया देश से हुई। इस वायरस के ज्यादातर पीड़ित आपको अफ्रीका में मिल जायेंगे। लेकिन अब इस बीमारी से अपने पैर पसारने शुरू कर दिये हैं और यह विश्व के कई बड़े देशो मे प्रभावी है। इसका प्रकोप मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व, यूरोप, रूस, कजाकिस्तान, बांग्लादेश (2019) चीन (2019), भूटान (2020), नेपाल (2020) और भारत (अगस्त, 2021) में देखा गया है। 
वही वर्तमान समय मे यह भारत मे प्रभावी है यह मुख्य रूप से गोवंश पर अपना प्रकोप बरसात है। लंपी वायरस के प्रकोप से संकर नस्ल की गायों की मौत देशी नस्ल की गायों की तुलना में अधिक होती है। इस रोग का प्रसार दूषित मक्की मच्छर से होता है। इसके अलावा यह रोग से पीड़ित गाय के रक्त व उसके जूठे पानी के प्रकोप स्व भी तेजी से फैलता है।
इस बीमारी का इलाज अगर आरम्भ में करवाया जाता है तो पशु दो से तीन दिनों में बिल्कुल स्वास्थ्य हो जाते हैं। इन जानवरों को अन्य जानवरों से अलग ही रखना चाहिए क्योंकि सम्पर्क में आने से अन्य जानवरों को यह रोग हो सकता है। अगर जानवर दूध देता है तो उसे उबालकर उपयोग किया जा सकता है। वही गाय के बच्चे को भी उबला दूध ही पिलाना चाहिए।

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