अंबेडकर जयंती पर इस बार सियासी रोटियां नहीं सेंक पाएंगे राजनितिक दल

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नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है, जिसे देखते हुए कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने प्रदेश में लॉकडाउन आगे बढ़ा दिया है । वही, केंद्र सरकार की तरफ से भी लॉकडाउन अवधि बढ़ाए जाने के संकेत मिल रहे हैं। कोरोना संकट के बीच 14 अप्रैल को यानी मंगलवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 129वीं जयंती आ रही है।

भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अंबेडकर जी के ही प्रयासों का प्ररिणाम है न केवल भारत में बल्कि पूरे दुनिया में सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठी। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने बाबा साहेब को जीवित रहते वह सम्मान नहीं दिया, जो उन्हें मिलना चाहिए था। उनकी मृत्यु के 4 दशक बाद उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया, लेकिन भाजपा सरकार उनके प्रस्तावों को एक वास्तविकता बनाने के लिए प्रयास कर रही है।

ऐसे में लॉकडाउन के चलते दलित समुदाय के सामाजिक नेताओं और सियासी पार्टियों के द्वारा अंबेडकर जयंती को अपने-अपने घरों से मनाने का आग्रह किया गया है। ऐसे में सियासी दलों को डॉ. अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने का मौका नहीं मिल पाएगा। अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष अशोक भारतीय ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना वायरस महामारी के चलते हम इस बार संसद में बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यारोपण कर श्रद्धांजलि अर्पित नहीं कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण लोग अपने-अपने घरों से अंबेडकर जयंती मनाएं, इसके लिए हमने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन बाबा साहेब को श्राद्धंजलि देने और उनकी प्रतिमा पर माल्यारोपण करने का बंदोबस्त किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण इस बार बाबा साहेब के नाम सियासी रोटियां सेंकने वालों को भी मौका नहीं मिल पाएगा।