राष्ट्रपति चुनाव: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज मतदान होना है। जिसका परिणाम 21 जुलाई को घोषित हो जाएगा। 21 जुलाई को सभी को देश का नया राष्ट्रपति मिल जाएगा ओर 25 जुलाई को राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह होगा। राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद में सभी तैयारी हो गई है। चुनाव के परिपेक्ष्य से संसद में 6 बूथ बनाए गए हैं। जिंसमे एक बूथ ऐसा है जो दिव्यंगों के लिए है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए अलग अलग राज्यो से कुल 9 विधायक वोट करेंगे। जबकी 42 सांसद सदन में वोट करेंगे। जानकारी के लिए बता दें राष्ट्रपति चुनाव में उत्तरप्रदेश से 4, त्रिपुरा से 2, असम से 1, हरियाणा से 1 विधायक वोट करेगा।
राष्ट्रपति चुनाव का मतदान आज, इस दिन आएगा परिणाम, जाने कौन है आगे
अगर हम एनडीए की बात करे तो उसने अपनी ओर से आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को मैदान में उतारा है। द्रौपदी मुर्मू अनुसूचित जाति से सम्बंधित दूसरी महिला है जिन्हें भारत के सर्वोच्च पद के लिए चुना गया है। द्रौपदी मुर्मू ने 2015 से लेकर 2021 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया है। यह झारखंड की 9 वीं राज्यपाल थी। अगर यह राष्ट्रपति का चुनाव जीतती है तो यह पहली आदिवासी महिला होंगी जो भारत के सर्वोच्च पद की हकदार होंगी।
हालाकि द्रौपदी मुर्मू के बलबूते पर भाजपा ने 2024 के चुनाव को साधने की रणनीति बनाई है। भाजपा द्रौपदी के जरी5आदिवासी समाज को ओर अपने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार धनखड़ के जरिए दलित समाज को साधने की कवायद में लगी है। यह एनडीए के उम्मीदवार राष्ट्रपति ओर उपराष्ट्रपति बनते हैं तो यह सत्ताधारी भाजपा के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है ओर भाजपा एक बार पुनः रूठे आदिवासी समाज पर अपनी पकड़ बना सकती है।
यशवंत सिन्हा विपक्ष के राष्ट्रपति पद के।उम्मीदवार है। यशवंत सिन्हा प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार से लेकर अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार के रहने तक वित्त मंत्री के रूप में काम किया है। यशवंत सिन्हा को राजनीति की अच्छी समझ है वह राजनीति के दाव पेजो को खूब समझते हैं ओर राजनीति में काफी सक्रिय भी रहते हैं। यशवंत सिन्हा ने साल 2018 मे भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ दिया था। यशवंत का कहना है कि वह पार्टी की नीतियों से असंतुष्ट थे जिसके चलते उन्होंने पार्टी का साथ छोड़ दिया था। भाजपा छोड़ने के बाद यह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। लेकिन जब इन्हें विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करने की बात कही गई तो इन्होंने इसकी घोषणा से एक दिन पहले तृणमूल कांग्रेस को छोड़ दिया था।
राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू का पलड़ा भारी लग रहा है। कई विपक्षी दल भी मुर्मू के समर्थन में खड़े हैं। वही यशवंत सिन्हा ने कहा है कि मैं द्रौपदी मुर्मू का सम्मान करता हूँ लेकिन वह जिस विचारधारा के साथ खड़ी है उसका नहीं। उन्होंने उद्धव ठाकरे द्वारा द्रौपदी मुर्मू को दिए जाने वाले समर्थन की घोषणा के बाद कहा कि भाजपा लोगो पर दवाब बना रही है कि लोग द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करे।
वही द्रौपदी मुर्मू को लेकर तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए हैं कि हमे राष्ट्रपति भवन में मूर्ति नही चाहिए। क्या किसी ने द्रौपदी मुर्मू को कभी बोलते हुए सुना है। यशवंत सिन्हा लोगो से बात कर रहे हैं। इंटरव्यू दे रहे हैं। लेकिन द्रौपदी मुर्मू एक बार भी समाने नहीं आई।