भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने का बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई। लेकिन अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कद्दावर नेता के समर्थकों को एडजस्ट करने की है। वहीं, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया की जोड़ी बनती दिखाई दे रही है। कोरोना संकट के कारण अभी तक शिवराज कैबिनेट का गठन नहीं हो पाया था लेकिन सोमवार देर रात पार्टी आलाकमान की सहमति के बाद पांच मंत्री शपथ ग्रहण कर रहे हैं। इन पांच में से दो ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद अटकलें लगाई जा रहीं थी कि नरेन्द्र सिंह तोमर और नरोत्तम मिश्रा मुख्यमंत्री बन सकते हैं, लेकिन पार्टी हाइकमान ने शिवराज सिंह चौहान के नाम पर मुहर लगाई। कहा जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद थे और पार्टी ने उनकी पसंद को सहमति दी है। वहीं, कैबिनेट गठन में भी शिवराज और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पसंद के नेताओं को जगह मिली है। सिंधिया समर्थक नेताओं को कैबिनेट में शामिल करने के लिए मध्यप्रदेश के कई सीनियर नेताओं को अभी कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि मिनी कैबिनेट के गठन के पीछे कोरोना संकट बताया गया है। कहा जा रहा है कि 3 मई के बाद शिवराज सिंह चौहान अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगे और उसमें पार्टी के सीनियर नेताओं को मौका मिलेगा।
शिवराज कैबिनेट में जिन पांच मंत्रियों को शामिल किया जाना है उसमें से तुलसी सिवालट और गोविंद सिंह राजपूत, ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। मीना सिंह और शिवराज सिंह गुट के माने जाते हैं। हालांकि कमल पटेल को संघ की पसंद भी बताया जा रहा है। वहीं, नरोत्तम मिश्रा केन्द्र की पसंद पर मंत्री बन रहे हैं।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री बनते ही शिवराज सिंह चौहान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को बड़ा तोहफा दिया। ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद एक बार फिर से मध्यप्रदेश की सिसायत में बढ़ गया है। कमलनाथ सरकार गिरने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर से पॉवर में आ गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास फिलहाल कोई पद तो नहीं है लेकिन ग्वालियर-चंबल में इन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद का ही हो रहा है। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार बनते ही ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद के अफसरों की तैनाती का सिलसिला शुरू हो गया था। ग्वालियर नगर निगम में संदीप कुमार माकिन को आयुक्त बनाया गया। माकिन को राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कमलनाथ सरकार ने हटा दिया था। कांग्रेस छोड़ते ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने एक पुराने मामले में जांच शुरू कर दी गई थी। लेकिन अब उस केस में ज्योतिरादित्य सिंधिया को क्लिनचीट मिल गई है।
भाजपा में शामिल होने के बाद भोपाल में ज्योतिरादित्य सिंधिया का भव्य स्वागत किया गया था। शिवराज सिंह चौहान उनके स्वागत में कसीदे पढ़ थे। शिवराज ने रामायण की गाथा सुनाई और कलयुगी रामायण में ज्योतिरादित्य को विभीषण का पात्र बताया था। शिवराज ने कहा था कि ‘अगर लंका पूरी तरह जलाना हो तो विभीषण की जरूरत होती है और अब तो सिंधिया जी भी हमारे साथ है।
