पेशावर : ‘या अल्लाह, या अल्लाह… जल्दी से एंबुलेंस बुलाओ यार…’ पेशावर की शिया मस्जिद में मंजर इतना खौफनाक है कि दिल दहल जाए। जामा मस्जिद में दिन जुमे की नमाज के बाद का है। दो हमलावरों ने कुछ देर पहले खुद को बम से उड़ा लिया है। बारूद की गंध के बीच हॉल में मांस के लोथड़े बिखरे पड़े हैं। खून का दरिया सा फूट पड़ा है। कुछ खुशनसीब जो बच गए, जख्म के दर्द से बेतरह कराह रहे हैं।
धमाके बाद लाशों के ढेर में अपनों को ढूंढने के लिए नजरें खौफ और बेचैनी के साथ दौड़ रही हैं। शरीर और आवाज कांप रही है। चीखें निकल रही हैं। खून से लथपथ एक शख्स ‘अब्बू-अब्बू कहां हों…’ कहते हुए बदहवास भागा जा रहा है।
‘खुदा इनको तबाह और बर्बाद कर दे… खुदा इनकी नस्लें मिटा दे… खुदा इनको नेस्तनाबूद करे… इन्होंने हमें तबाह और बर्बाद कर दिया… मेरे खानदान के दोनों शहीद कर दिए…’ दूसरा शख्स यह कहते हुए निढाल होकर जमीन पर बैठ जाता है। स्ट्रेचर पर खून से लथपथ लाशें हैं।
Bomb Blast in Jamia Mosque, Qissa Khani Bazar during Friday Parayer.
Its Heart breaking. Many injured.
May Allah keep everyone safe.
So India is invading again actively. #Peshawar#BREAKING pic.twitter.com/pJAesMFe67
— Amna Chaudhry (@amnachaudhry01) March 4, 2022
पाकिस्तान के लिए किसी शिया मस्जिद का यह मंजर नया नहीं है। पाकिस्तान की 22 करोड़ की आबादी में 20 फीसदी लोग शिया हैं। एक सुन्नी बहुल देश में ये शिया मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। लेकिन एक सच यह भी है कि पाकिस्तान में ईरान के बाद सबसे ज्यादा शिया रहते हैं।
कराची, लाहौर, रावलपिंडी, बलूचिस्तान और मुल्तान में इनकी ज्यादातर आबादी रहती है। आंकड़ों में शिया पाकिस्तान का एक प्रताड़ित समुदाय नजर आता है। साउथ एशिया टेररिजम पोर्टल की मानें तो साल 2001 से 2018 तक पाकिस्तान में 4847 शिया मुसलमानों को मार दिया गया।
#Peshawar blast is Shia Genocide#Peshawar is easy to blame on foreign hands and absolve the Government of responsibility but hard to lay hands on secret agendas with terrorists pic.twitter.com/uihErD7Vsw
— حیدر ابوذر (@_MHR313) March 4, 2022
पाकिस्तान में शिया मुसलमानों को अक्सर ईशनिंदा का शिकार बनाया जाता है। साल 2020 में सिर्फ अगस्त महीने में शियाओं के खिलाफ 42 ईशनिंदा के केस दर्ज हुए। एक 3 साल के शिया बच्चे पर भी ईशनिंदा के तहत मामला दर्ज किया गया। पाकिस्तान में शिया और सुन्नी की लड़ाई बहुत पुरानी है। मुहर्रम के दौरान यह विवाद इतना बढ़ जाता है कि कई जगहों पर हिंसक रूप भी ले लेता है। लेकिन इस विवाद की जड़ें हमें इतिहास में मिलती हैं।
शिया मुसलमानों का कहना है कि अली और उनके वंशज ही मुसलमानों का नेतृत्व कर सकते हैं। शिया अली को पैगंबर मोहम्मद का असली उत्तराधिकारी मानते हैं जो उनके दामाद थे। वहीं सुन्नी मुसलमान किसी को भी पैगंबर मोहम्मद का उत्तराधिकारी नहीं मानते हैं। इसी बात को लेकर पाकिस्तान में अक्सर ये दोनों समुदाय आमने-सामने आ जाते हैं। शुक्रवार को हुए धमाके में अब तक 56 लोगों की मौत हो चुकी हैं और 190 लोगों के घायल होने का खबर आ रही है।
