नई दिल्ली। कोविड-19 की वजह से भयंकर वित्तीय झंझावत में फंसे केंद्र सरकार को 15वें वित्त आयोग ने बड़ी राहत दी है। ऐसे समय जब सरकार पर बड़ी उधारी के आसार बढ़ रहे हैं, तब आयोग ने सरकार से साफ कहा है कि उसे कर्ज और वित्तीय दबाव की परवाह किए बगैर अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने पर ध्यान देने की जरूरत है।
वित्त आयोग के चेयरमैन एन.के. सिंह ने अपने सलाहकार परिषद के साथ बैठक में कहा कि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकार पर भारी वित्तीय दबाव है और दोनों की तरफ से राजस्व संग्रह काफी कम दिखाया गया है। शुक्रवार को वित्त आयोग ने अपने सलाहकार परिषद के साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं कृषि मंत्रालय के साथ बैठकें की। सलाहकार परिषद के सदस्यों ने कहा कि कोरोना का देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और इससे देश के राजस्व संग्रह भी प्रभावित होगा।
सलाहकार परिषद ने संघ और राज्य सरकारों के कर राजस्व संग्रहण में अर्थव्यवस्था में आई बाधाओं की वजह से पड़े प्रतिकूल प्रभावों पर भी चर्चा की। परिषद के कुछ सदस्यों ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण कर संग्रहण प्रभावित हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कर संग्रह पर महामारी का प्रभाव विषम भी हो सकता है। सलाहकार परिषद के सदस्यों ने बैठक में कहा कि आगे बढ़ने में बड़ी अनिश्चितता है और पांच साल की अवधि के लिए राजकोषीय हस्तांतरण को तैयार करने में आयोग के सामने बड़ी चुनौतियां होंगी। सलाहकार परिषद के साथ आयोग आíथक और राजकोषीय मोर्चे पर उभरते संकेतों की बारीकी से निगरानी करेगा ताकि सर्वोत्तम संभव मूल्यांकन किया जा सके।
सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में आयोग के सभी सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।15वें वित्त आयोग (एफसी-15) ने अपने सदस्यों के साथ ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं उनके मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सड़कों के रख-रखाव पर 2020-21 के लिए इसकी रिपोर्ट में एफसी-15 द्वारा दी गई सामान्य रूपरेखा पर ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ बैठक आयोजित की। 15वें वित्त आयोग ने वर्ष 2020-21 के लिए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्रामीण सड़कें ग्रामीण विकास के लिए उत्प्रेरक और गरीबी उन्मूलन पहलों का एक उल्लेखनीय तत्व मानी जाती हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत अभी तक 5,50,528 किमी लंबी सड़क का निर्माण हो चुका है और सभी पात्र बस्तियों के 89 प्रतिशत को इससे जोड़ा जा चुका है।



