499 साल बाद बना है ये योग, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानिये

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नई दिल्ली/नोएडा एकता और भाई चारे का प्रतीक होली का त्योहार 29 मार्च को मनाया जाएगा। इस वर्ष खास बात यह है कि इस दिन ध्रुव योग भी बन रहा है, जो 499 साल बाद पड़ रहा है। बता दें कि होली की रंंगत एक सप्ताह पहले होलाष्टक से नजर आने लगती है। इस दिन से होली का रंग और चटख होने लगता है। होलाष्टक तिथि 22 मार्च से आरंभ होकर 28 मार्च को समाप्त होगी। 28 मार्च को होलिका दहन के दिन तक इसका मान रहेगा। रंगों की होली फाल्गुन मास की तिथि को मनाई जाएगी यानी 29 मार्च को रंग खेला जाएगा और दिन होगा सोमवार।

बाजारों में होगा खास इंतजाम

होली का नाम आते ही जिस मस्ती और उल्लास का एहसास होता है, उसमें एक नया रंग भी भरने वाला है। होलाष्टक के साथ ही रंगों का बाजार सजने लगेगा। राजधानी दिल्ली के सरीजनी नगर, चांदनी चौक, लाजपतनगर, विकास पुरी के अलावा, नोएडा सेक्टर-18, सेक्टर-27 अट्टा मार्केट, बरौला मार्केट, इंदिरा मार्केट सहित शहर सभी बाजारों में रंग और गुलाल नजर आने लगेंगे। इस बार आम, अनार, संतरा और नीबू की खूशबू वाले हर्बल गुलाल सभी को होली का नया एहसास कराएंगे। नोएडा के दुकानदार विनय ने बताया कि होलाष्टक के साथ ही खरीदारी का दौर शुरू होगा। बाजार हर्बल रंगों से सजने लग गए हैं।

होलिका दहन का मुहूर्त

दिल्ली से सटे नोएडा सेक्टर-19 स्थित सनातन धर्म मंदिर के पुजारी वीरेंद्र नंदा ने बताया कि इस बार होली के दिन चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेगा। साथ ही मकर राशि में गुरु और शनि विराजमान रहेंगे। शुक्र और सूर्य मीन राशि में रहेंगे। इस बार होली का खास महत्व है। 28 मार्च को होली दहन का मुहूर्त शाम 6:21 बजे से रात 8:41 बजे तक है। शुभ मुहूर्त में गुलाब व बेला की खुशबू युक्त गुलाल अर्पित करना शुभ माना जाता है। वहीं, पूर्णिमा तिथि 28 मार्च को सुबह करीब 03:30 बजे से 29 मार्च की रात करीब 12.15 बजे तक रहेगी।

होली पूजा की विधि

नोएडा सेक्टर-55 स्थित शिव मंदिर पुजारी राम नारायण शास्त्री ने बताया कि होलिका दहन से पहले होली पूजन का विधान है। होली पूजा से पूर्व स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। होली पूजा के लिए आप अक्षत्, गंध, फूल, कच्चा सूत, एक लोटा जल, माला, रोली, गुड़, गुलाल, रंग, नारियल, गेंहू की बालियां, मूंग आदि का प्रबंध कर लें। इसके बाद पूजा सामग्री लेकर होलिका के स्थान पर जाएं। वहां, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। फिर गंध, धूप, पुष्प आदि से होलिका की पंचोपचार विधि से पूजा करें। इसके बाद अपने पितरों, परिवार के नाम से बड़गुल्ले की एक-एक माला होलिका को समर्पित करें। इसके बाद 3 या 7 बार परिक्रमा करें। इस दौरान कच्चा सूत होलिका में लपेट दें। अब लोटे का जल तथा अन्य पूजा सामग्री होलिका को समर्पित कर दें। इस प्रकार होली की पूजा पूर्ण हो जाएगी। होली पूजा के बाद बताए गए मुहूर्त में परिजनों के साथ सार्वजनिक स्थान पर बनी होलिका के पास एकत्र हो जाएं। अब कपूर या उप्पलों की मदद से होलिका में आग प्रज्जवलित कर दें।

होलिका दहन के दिन इन बातों का रखें ध्यान

  •  इस दिन सफेद खाद्य पदार्थ ग्रहण न करें
  •  इस दिन कोई मांगलिक या शुभ कार्य न करें
  •  होलिका दहन पूजन के दौरान हमेशा अपना सिर कपड़े से ढककर ही पूजा करें
  •  नवविवाहित महिलाएं व सास और बहु एक साथ होलिका दहन न देंखे

यहां पर बता दें कि होलिका दहन और रंगों का त्योहाल होली मनाने के दौरान यह भी ध्यान रखें कि मास्क जरूर पहनें और शारीरिक दूरी का भी पालन करे। सबसे अच्छा तो यही है कि परिवार के साथ अच्छे पकवान बनाकर होली मनाएं और कोरोना वायरस से भी बचें।

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