गुरुवार, 20 अगस्त 2026
मुख्य पृष्ठ
प्रदेश खबरें 06:49 am3 मिनट पठन समय

NEET Paper Leak: सोनम वांगचुक के अनशन का 16वां दिन, छात्रों के भविष्य के लिए दांव पर जान, फिर भी क्यों चुप है सरकार?

NEET Paper Leak:  जब हमारे देश का युवा किसी सरकारी नौकरी या एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करता है, तो वह अपना दिन-रात एक कर देता है।

Mayank Gaur (वरिष्ठ संवाददाता)

14 जुलाई 2026

NEET Paper Leak: सोनम वांगचुक के अनशन का 16वां दिन, छात्रों के भविष्य के लिए दांव पर जान, फिर भी क्यों चुप है सरकार?

NEET Paper Leak:  जब हमारे देश का युवा किसी सरकारी नौकरी या एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करता है, तो वह अपना दिन-रात एक कर देता है। लेकिन जब उसे पता चलता है कि जिस परीक्षा के लिए उसने सालों मेहनत की, उसका ‘पेपर लीक’ हो गया है, तो उसका दिल टूट जाता है। आजकल देश में नीट (NEET-UG) जैसी बड़ी परीक्षाओं में हुई धांधली और भ्रष्टाचार का मुद्दा हर जगह छाया हुआ है।

इसी मुद्दे पर छात्रों को न्याय दिलाने के लिए, देश के मशहूर शिक्षाविद् (Educationist) और रमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आज उनके अनशन को 16 दिन हो चुके हैं। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार ने इस पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।

आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा आंदोलन क्या है, छात्रों की मांगें क्या हैं और 59 साल के सोनम वांगचुक की सेहत इस वक्त कैसी है।

जंतर-मंतर पर क्या हो रहा है? (आंदोलन की शुरुआत)

यह पूरा विवाद देश के एग्जामिनेशन सिस्टम और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है।
इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 20 जून 2026 को हुई थी, जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA) जैसे छात्र संगठनों ने पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर डेरा डाला था।

छात्रों के इस संघर्ष को देखकर सोनम वांगचुक खुद को रोक नहीं पाए। वे हमेशा से शिक्षा और पर्यावरण के लिए लड़ते रहे हैं। छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए वांगचुक 28 जून 2026 को इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Hunger Strike) में शामिल हो गए।

सोनम वांगचुक और छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?

जंतर-मंतर पर बैठे इन प्रदर्शनकारियों की मांगें बिल्कुल साफ और सीधी हैं:

  1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं में जो भी धांधली हुई है, उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

  2. पीड़ित परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक और सिस्टम की नाकामी से निराश होकर जिन लगभग 20 छात्रों ने आत्महत्या कर ली, उनके परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा (Compensation) दिया जाए।

  3. सिस्टम में सुधार: देश की परीक्षा प्रणाली में तुरंत सुधार किया जाए और NTA के काम करने के तरीके की एक निष्पक्ष जांच हो, ताकि आगे किसी छात्र के साथ धोखा न हो।

16 दिन बाद कैसी है वांगचुक की सेहत? (डराने वाले आंकड़े)

लगातार 16 दिनों से सिर्फ पानी और नमक के सहारे जिंदा रहने का असर अब 59 साल के सोनम वांगचुक के शरीर पर साफ दिखने लगा है। मेडिकल बुलेटिन के जो आंकड़े सामने आए हैं, वो किसी को भी डरा सकते हैं:

  • वजन: वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम तक कम हो गया है।

  • ब्लड शुगर (Sugar Level): उनका ब्लड शुगर गिरकर 67 mg/dL तक पहुंच गया है, जो एक आम इंसान में 100 के आसपास होना चाहिए।

  • ब्लड प्रेशर (BP): बीपी 107/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया है।

  • शारीरिक हालत: उन्हें गंभीर कमजोरी आ गई है, चक्कर आ रहे हैं और शरीर की पसलियां साफ दिखाई देने लगी हैं।

सिर्फ वांगचुक ही नहीं, उनके साथ अनशन पर बैठे AISA के एक छात्र की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे ‘हाइपोवोलेमिक शॉक’ (Hypovolemic shock) के कारण तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

सरकार की चुप्पी और विपक्ष का समर्थन

एक तरफ जहां जंतर-मंतर पर लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार और मुख्यधारा की मीडिया (Mainstream Media) ने इस मुद्दे पर ‘मुंह में दही जमा’ रखा है।

लेकिन, विपक्षी पार्टियां अब खुलकर छात्रों के समर्थन में आ गई हैं।

  • आम आदमी पार्टी (AAP): दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी ने जंतर-मंतर जाकर वांगचुक और छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया।

  • अन्य नेता: शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे, डीएमके (DMK) सांसद कनिमोझी और कई वामपंथी नेताओं ने सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है।

सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार से बहुत ही मार्मिक अपील करते हुए कहा है, “इसे अपने अहंकार की लड़ाई न बनाएं, यहां इंसानी जानें दांव पर लगी हैं। अपनी गलती मान लेना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि जवाबदेही का प्रतीक है।”

आगे क्या होगा? (20 जुलाई का संसद मार्च)

प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई 2026 को वे जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक एक बड़ा और शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे।

हालांकि, छात्रों और प्रदर्शनकारियों को यह भी डर सता रहा है कि इस मार्च से पहले या बाद में पुलिस उन पर UAPA या NSA जैसे सख्त कानून लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। लेकिन उनका हौसला बुलंद है और वे छात्रों के भविष्य के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार हैं।

एक ऐसा व्यक्ति जिसे उसके इनोवेशन के लिए ‘रमन मैग्सेसे’ जैसा बड़ा अवॉर्ड मिला हो, वह आज सड़क पर युवाओं के भविष्य के लिए भूखा बैठा है। ऐसे में सरकार का उनसे बात न करना हमारे लोकतंत्र में ‘संवादहीनता’ (Communication Gap) का एक बहुत ही निराशाजनक उदाहरण है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ेगी और देश के लाखों छात्रों को एक सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली का भरोसा दिलाएगी।

“छात्रों की स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनियमितताओं पर कठोरतम प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

आगे पढ़ें (Read Next)

अध्यात्म

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर बन रहा है अद्भुत संयोग, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

इस साल हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर बन रहे अद्भुत महासंयोग से मेष, वृषभ, सिंह और धनु राशि वालों की किस्मत चमकने वाली है।

13 सित॰ 2026
उत्तर प्रदेश

Lucknow Cyber Fraud: क्या है डिजिटल अरेस्ट और टेरर फंडिंग का वो खेल, जिसमें लखनऊ के रिटायर्ड अफसर ने गंवाए 19 लाख

लखनऊ में साइबर ठगों ने परिवहन विभाग के एक रिटायर्ड अधिकारी को पुलवामा आतंकी हमले और पाकिस्तान टेरर फंडिंग का डर दिखाकर 19 लाख रुपये ठग लिए हैं।

13 सित॰ 2026