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Panch Kailash Yatra: कैलाश मानसरोवर ही नहीं, हिमालय में छिपे हैं शिव के ये 4 और ‘कैलाश', दर्शन से पहले जान लें पूरी डिटेल

Panch Kailash Yatra: हमारे देश में भगवान शिव के भक्तों की कोई कमी नहीं है। सावन का महीना हो या महाशिवरात्रि, शिव भक्त हमेशा अपने आराध्य

Mayank Gaur (वरिष्ठ संवाददाता)

29 जून 2026

Panch Kailash Yatra: कैलाश मानसरोवर ही नहीं, हिमालय में छिपे हैं शिव के ये 4 और ‘कैलाश', दर्शन से पहले जान लें पूरी डिटेल

Panch Kailash Yatra: हमारे देश में भगवान शिव के भक्तों की कोई कमी नहीं है। सावन का महीना हो या महाशिवरात्रि, शिव भक्त हमेशा अपने आराध्य के दर्शन के लिए आतुर रहते हैं। ज्यादातर लोग 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने जाते हैं या फिर हिमालय की हजारों फीट ऊंची वादियों में बसे शिव मंदिरों की ओर रुख करते हैं। पहाड़ों की ऊंचाई और वहां की शांति इन मंदिरों की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है।

हर शिव भक्त की जिंदगी की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती है कि वह एक बार ‘कैलाश’ जरूर जाए, जिसे भगवान शिव का असली घर माना जाता है। लेकिन, जब भी कैलाश का जिक्र होता है, तो हमारे दिमाग में सिर्फ ‘कैलाश मानसरोवर’ का नाम आता है।

क्या आप जानते हैं कि हिमालय की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं में सिर्फ एक नहीं, बल्कि पूरे पांच कैलाश मौजूद हैं? जी हां, इन्हें ‘पंच कैलाश’ (Panch Kailash) कहा जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से एक तिब्बत में है, जबकि बाकी चार हमारे भारत में ही मौजूद हैं। आइए, एक दोस्त की तरह आसान भाषा में आपको इन पांचों कैलाश के बारे में बताते हैं।

1. कैलाश मानसरोवर (तिब्बत): सबसे पवित्र और प्रमुख धाम

जब भी पंच कैलाश की बात होती है, तो सबसे पहला और प्रमुख नाम ‘कैलाश मानसरोवर’ का ही आता है। यह जगह तिब्बत में स्थित है।

यह पवित्र स्थान सिर्फ हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि बौद्ध और जैन धर्म के लोगों के लिए भी बहुत खास है। यहां का विशाल कैलाश पर्वत और उसके पास मौजूद नीले पानी की ‘मानसरोवर झील’ का नजारा देखते ही बनता है। अगर इसकी ऊंचाई की बात करें, तो यह समुद्र तल से लगभग 6,638 मीटर (यानी करीब 21,778 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। चूंकि यह तिब्बत (चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र) में है, इसलिए यहां जाने के लिए आपको सरकार से खास परमिशन और वीजा की जरूरत पड़ती है।

2. आदि कैलाश (उत्तराखंड): जिसे ‘छोटा कैलाश’ भी कहते हैं

पंच कैलाश में दूसरा नंबर आता है ‘आदि कैलाश’ का। यह हमारे भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथोरागढ़ जिले में मौजूद है।

कई लोग इसे ‘छोटा कैलाश’ भी कहते हैं और इसे कैलाश मानसरोवर का ही दूसरा रूप माना जाता है। जो श्रद्धालु आदि कैलाश के दर्शन करने आते हैं, वे इसके साथ ही ‘ओम पर्वत’ और ‘पार्वती सरोवर’ के भी दर्शन जरूर करते हैं। ओम पर्वत पर प्राकृतिक रूप से बर्फ से ‘ॐ’ की आकृति बनती है। समुद्र तल से करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस जगह तक पहुंचने के लिए आपको पहले काठगोदाम आना होता है। वहां से शेयरिंग या प्राइवेट टैक्सी लेकर आप इस पवित्र सफर की शुरुआत कर सकते हैं।

3. श्रीखंड कैलाश (हिमाचल प्रदेश): रंग बदलने वाला प्राकृतिक शिवलिंग

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में स्थित ‘श्रीखंड कैलाश’ पंच कैलाश की लिस्ट में तीसरे स्थान पर आता है।

यह जगह अपने आप में एक चमत्कार है। यहां पहाड़ों के बीच लगभग 75 फीट ऊंची एक प्राकृतिक शिला (चट्टान) मौजूद है, जिसे शिव भक्त शिवलिंग के रूप में पूजते हैं। इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मौसम और सूरज की रोशनी के हिसाब से इस शिवलिंग का रंग कभी-कभार बदलता हुआ नजर आता है। यह ट्रैक काफी कठिन माना जाता है, लेकिन ट्रेकिंग (Trekking) के शौकीन युवा और शिव भक्त हर साल भारी संख्या में यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

4. किन्नौर कैलाश (हिमाचल प्रदेश): 79 फीट ऊंची चट्टान में बसे महादेव

अगर आप इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर ट्रैवल वीडियोज देखते हैं, तो आपने ‘किन्नौर कैलाश’ के खूबसूरत नजारे जरूर देखे होंगे। यह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है।

यहां पहाड़ की चोटी पर एक बहुत बड़ी चट्टान है, जिसे भगवान शिव का स्वरूप (शिवलिंग) माना जाता है। इस चट्टान की ऊंचाई करीब 79 फीट है। किन्नौर कैलाश तक पहुंचने का रास्ता काफी चुनौती भरा है। यहां खड़ी चढ़ाई और कठिन रास्तों पर ट्रेक करना पड़ता है। लेकिन जब आप ऊपर पहुंचते हैं, तो वहां से दिखने वाला नजारा आपको ऐसा लगेगा जैसे आप साक्षात स्वर्ग में आ गए हों। आपकी सारी थकान पल भर में गायब हो जाएगी।

5. मणिमहेश कैलाश (हिमाचल प्रदेश): झील के किनारे रहस्यमयी चमक

पंच कैलाश का पांचवां और आखिरी धाम है ‘मणिमहेश कैलाश’। यह भी हिमाचल प्रदेश के बेहद खूबसूरत चंबा जिले में स्थित है।

इस पर्वत के ठीक नीचे एक बहुत ही शांत और पवित्र झील है, जिसे ‘मणिमहेश झील’ कहा जाता है। इस झील में जब कैलाश पर्वत की परछाई पड़ती है, तो वह दृश्य आंखों में बस जाता है। स्थानीय लोगों और भक्तों का मानना है कि इस पर्वत पर एक रहस्यमयी मणि मौजूद है, जिसकी चमक कभी-कभार दिखाई देती है। सावन और भादों के महीने में यहां ‘मणिमहेश यात्रा’ लगती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।

“छात्रों की स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनियमितताओं पर कठोरतम प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

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