गुजरात मे किसका बजेगा डंका दिल्ली मॉडल या गुजरात मॉडल

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गुजरात चुनाव: गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को है। सत्ताधारी दल भाजपा गुजरात मे अपनी पुनर्वापसी कर अपने जीत के इतिहास को कायम रखना चाहती है। वही कांग्रेस गुजरात मे अपने 27 साल के वनवास को खत्म कर सत्ता का अमृतपान करना चाह रही है। लेकिन कांग्रेस और भाजपा की लड़ाई के बीच मे आम आदमी पार्टी रोड़ा बनकर खड़ी है यह गुजरात मे अपने दिल्ली मॉडल के बलबूते पर कांग्रेस और कांग्रेस को किनारे कर अपनी धमक बनाना चाह रही है। 

गुजरात में आम आदमी पार्टी का सीधा उद्देश्य कांग्रेस को मात देकर कांग्रेस की जगह खुद को भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करना है। इस चुनावी भगदड़ के बीच गुजरात मे दिल्ली मॉडल और गुजरात मॉडल के बीच भिड़त शुरू हो गई है। जहां एक ओर भाजपा के लोग इस बात का दवा कर रहे हैं कि गुजरात मॉडल ने गुजरात की छवि बदल दी है। वही आम आदमी पार्टी दिल्ली मॉडल के बलबूते पर गुजरात फतेह करना चाहती है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि मोदी सरकार का गुजरात मॉडल ठीक वैसे ही जैसे खाने के दांत कुछ ओर दिखाने के कुछ ओर।
जानकारों का कहना है कि भाजपा के गुजरात मॉडल की चर्चा देश विदेश तक है। इसी मॉडल के बलबूते पर भाजपा ने भारत के कई राज्यों में अपनी सरकार स्थापित की है। बीजेपी के गुजरात मॉडल में भरपूर नौकरी, कम महंगाई ,ज्यादा कमाई, तीव्र गति से अर्थव्यवस्था का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, दूरस्थ सुरक्षा और बेहतरीन जीवन है। वही अगर हम बात दिल्ली मॉडल की करे तो असकी प्रथम प्राथमिकता बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा है। दिल्ली सरकार का कहना है यह विकास की मूलभूत आवश्यकता है शिक्षा देश को आगे बढ़ाने का जरिया है। वही भाजपा का कहना है गुजरात की जनता सच जानती है वह जानती है कि गुजरात मॉडल उनके विकास का माध्यम बना है। गुजरात मे दिल्ली मॉडल फेल होगा।

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