इस गांव का नाम बताने में लोगों को आती थी शर्म, अब हुआ नया नामकरण

admin
By admin
4 Min Read

डेस्क।Jharkhand Village Story: झारखंड के देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड की बंका पंचायत के एक गांव का नाम पहले ऐसा था कि लोग उसका नाम लेने से भी शर्माते थे। वहीं स्कूल व कॉलेज में बच्चों को अपने गांव का नाम बताने में भी काफी शर्म आती थी। साथ ही इस कारण छात्र-छात्राएं स्कूल-कॉलेज या दोस्तों को अपने गांव का नाम भी नहीं बता पाते थे। और गांव का नाम ऐसा था कि बताने पर लोग उनका काफी मजाक उड़ाया करते थे। आखिरकार नयी पीढ़ी ने गांव के नये नामकरण का फैसला कर लिया है और ग्राम सभा की बैठक में गांव का नया नामकरण भी किया गया है। अब गर्व से लोग अपने गांव का नाम भी लेते हैं। 
गांव के नामकरण को लेकर ग्राम सभा की बैठक
देवघर के इस गांव का नाम जाति, आवासीय एवं आय प्रमाण पत्रों में देखकर लोग हंसने लगते थे और वर्षों से चलती आ रही इन परेशानियों को नयी पीढ़ी के युवाओं ने बदलने का मन बना लिया। इसके लिए पंचायत का सहारा लिया गया। बंका पंचायत के तत्कालीन ग्राम पंचायत प्रधान रंजीत कुमार यादव ने गांव के सारे सरकारी दस्तावेजों में नया नामकरण करने के लिए ग्राम सभा की बैठक बुलायी है। इस बैठक में सर्वसम्मति से गांव का पुराना नाम बदलकर नया नाम मसूरिया रखने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। सभी सरकारी कार्यालय समेत दस्तावेजों में विशेष तौर पर मसूरिया के नाम से गांव की इंट्री भी करायी गई है। वहीं अब राजस्व विभाग की वेबसाइट में भी मसूरिया गांव का नाम दर्ज किया गया है।
गांव का नाम बताने में नहीं आती शर्म
बता दें अब इस गांव के नये नाम से लोग अपनी जमीन का लगान भी जमा करते हैं। वहीं अंचल कार्यालय के राजस्व ग्राम समेत थाना व प्रखंड कार्यालय के राजस्व ग्रामों की सूची में मसूरिया का नाम भी दर्ज कराया गया है। और अब प्रखंड कार्यालय से संचालित विकास योजना भी मसूरिया के नाम से ही हो रहा है। इसी कड़ी में छात्रों को स्कूल व कॉलेज में जमा करने के लिए जाति, आवासीय व आय प्रमाण पत्र भी मसूरिया के नाम से ही जारी हो रहा है साथ ही बच्चों को अपने गांव का नाम बताने में अब दिक्कत भी नहीं होती है।
ग्राम प्रधान ने की पहल
बंका पंचायत के तत्कालीन प्रधान रंजीत कुमार यादव यह कहते हैं कि पुराने पर्चे में गांव का नाम आपत्तिजनक दर्ज था। आज इंटरनेट के दौर में छात्रों को अपने गांव का पुराना नाम लिखने पर काफी परेशानी भी हो रही थी।
विशेषकर लड़कियों को स्कूल व कॉलेज में गांव का नाम बताने में शर्म आती थी और ग्राम सभा के माध्यम से सभी सरकारी दस्तावेजों में अब गांव का नया नाम मसूरिया कर दिया गया है और पीएम आवास योजना भी अब मसूरिया के नाम से ही आवंटित होता है और सभी प्रमाण पत्र भी मसूरिया के नाम से जारी किए जा रहे है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *