संधि काल में ही माता ने किया था चंड-मुंड का अंत, अष्टमी में होती है विशेष पूजा

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आज अष्टांग योग की अधिष्ठात्री देवी महागौरी की पूजा-अर्चना होगी। सौभाग्य, धन-संपदा, सौंदर्य और स्त्री जनित गुणों की अधिष्ठात्री देवी महागौरी को माना जाता हैं। 

मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने कालीजी पर गंगाजल छिड़का तो वह महागौरी हो गईं। महागौरी सृष्टि का आधार एवं अक्षत सुहाग की प्रतीक हैं। 

माता के महागौरी रूप की पूजा-अर्चना विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का फल प्रदान करती है।

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी पूजन का खास महत्व है। अष्टमी के दिन महागौरी की आराधना तो वहीं नवमी पर मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाएगा। शनिवार को अष्टमी तिथि का मान है। इस दिन कन्या पूजन और हवन किया जाता। वहीं नवमी का मान रविवार को होगा। इस दिन संधिकाल का भी विशेष महत्व है। संधि काल में ही देवी ने प्रकट होकर चंड-मुंड का संहार किया था। समय माता रानी को विशेष भोग लगाने की भी परंपरा है। संधि पूजा नौ अप्रैल को 12.57 से 1.47 बजे तक होगी।

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