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Home » Blog » रेलवे निजीकरण: सुरक्षा के लिए खतरा या विकास का रास्ता?
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रेलवे निजीकरण: सुरक्षा के लिए खतरा या विकास का रास्ता?

admin
Last updated: April 18, 2026 9:18 am
admin
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भारतीय रेलवे, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेलवे, यात्री सुरक्षा के मामले में लापरवाही बरत रही है। यह आरोप रेलवे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (RCWU) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एम. साईबाबू ने लगाया है। उन्होंने विशाखापत्तनम में शनिवार (19 अक्टूबर, 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 40 ट्रेन दुर्घटनाओं में 313 यात्री और चार रेलवे कर्मचारी मारे गए।

Contents
निजीकरण का बढ़ता असर:निजीकरण के कारण सुरक्षा में गिरावट:निजीकरण से रेलवे की संपत्ति का ह्रास:ठेका कर्मचारियों के साथ अन्याय:भविष्य में क्या?मुख्य takeaways:

निजीकरण का बढ़ता असर:

एम. साईबाबू ने आगे आरोप लगाया कि भारतीय रेलवे में 3 लाख से अधिक पद खाली हैं, जिनमें से बड़ी संख्या सुरक्षा श्रेणी के पद जैसे स्टेशन मास्टर, सिग्नलिंग स्टाफ, लोको पायलट, गार्ड और तकनीशियन शामिल हैं। इन सुरक्षा पदों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति के बजाय, ‘निजीकरण’ के नाम पर ‘अप्रशिक्षित कर्मचारियों’ का उपयोग किया जा रहा है। उन्हें प्रदान किए जा रहे उपकरण भी ‘पुराने’ हैं और सुरक्षा श्रेणी के कर्मचारियों को नवीनतम उपकरणों के संचालन के बारे में उचित प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। खाली पदों को न भरने से मौजूदा कर्मचारियों पर भारी दबाव पड़ रहा है।

निजीकरण के कारण सुरक्षा में गिरावट:

सुरक्षा के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी ‘शॉर्टकट’ तरीके अपनाए जा रहे हैं। साईबाबू के अनुसार, प्रत्येक दुर्घटना के बाद नियुक्त विभिन्न जांच आयोगों द्वारा दिए जा रहे रिपोर्टों को लागू नहीं किया जा रहा है और उन रिपोर्टों को त्याग दिया जा रहा है। यह सब देश में रेलवे दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के पीछे के कारणों की व्याख्या करता है।

निजीकरण से रेलवे की संपत्ति का ह्रास:

रेलवे की जमीन और संपत्ति को ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ के नाम पर निजी पार्टियों को सौंप दिया जा रहा है। देश भर में रेलवे में काम कर रहे लगभग पाँच लाख ठेका कर्मचारी उचित मजदूरी और अन्य लाभों से वंचित हैं। उन्हें नौकरी की सुरक्षा भी नहीं है क्योंकि ठेकेदार बदलने पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं।

ठेका कर्मचारियों के साथ अन्याय:

साईबाबू ने कहा कि ‘प्रमुख नियोक्ता’ के रूप में रेलवे प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि ‘ठेकेदार’ ठेका श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और अन्य लाभ दे रहा है।

भविष्य में क्या?

रेलवे में ‘निजीकरण’ के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने और ठेका श्रमिकों के अधिकारों के लिए भी आंदोलन किया जाएगा। इन मुद्दों पर 20 दिसंबर को दिल्ली में एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

मुख्य takeaways:

  • भारतीय रेलवे यात्री सुरक्षा के मामले में लापरवाही बरत रही है।
  • रेलवे में ‘निजीकरण’ के कारण सुरक्षा मानकों में गिरावट आई है।
  • ठेका कर्मचारियों को उचित मजदूरी और अन्य लाभों से वंचित किया जा रहा है।
  • रेलवे प्रशासन रेलवे में ‘निजीकरण’ के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है।
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