भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 1800 के आंकड़े को पार कर चुकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश में संक्रमण की चपेट में आए लोगों की संख्या 100 के पार है। ऐसे में यह सुनकर आपके होश फाख्ता हो जाएंगे कि नोएडा में इस वायरस की चपेट में आए लोगों की संख्या 48 है और इनमें से 32 लोगों को संक्रमण सीजफायर कंपनी के जरिए मिला है। किस तरह से इतनी बड़ी लापरवाही होती रही और किसी की नजर नहीं गई। कैसे आग बुझाने वाले उपकरणों को तैयार करने वाली सीजफायर ‘कोरोना कंपनी’ में तब्दील हो गई।
17 मार्च को ब्रिटेन से जॉन नाम का शख्स ऑडिट का काम करने आया था। वह कोरोना वायरस से संक्रमित था लेकिन उसने यह बात छिपाए रखी, जिसकी वजह से कंपनी के कई लोग और उनके परिवार वाले संक्रमित पाए गए हैं। सीजफायर कंपनी नोएडा के सेक्टर-135 में है।
सबसे पहले 24 मार्च को शालीमार गार्डन में रहने वाला कंपनी का एक कर्मचारी जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। 27 मार्च को आई उसकी रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि हुई। अगले दिन कंपनी की एचआर मैनेजर और उसके पति में कोरोना कन्फर्म हुआ। पूछताछ में पता चला कि पिछले कुछ दिनों में इन दोनों (कंपनी की एचआर और उनके पति) के संपर्क में 93 लोग आए हैं। 31 मार्च को कंपनी का एक और कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव निकला। उसके संपर्क में 7 लोगों के आने की जानकारी मिली। कहा जाता है कि कुल संक्रमित 32 लोगों में करीब 16 लोग तो कंपनी के कर्मचारी हैं जबकि अन्य मरीज परिवारवाले हैं जो तमाम बातों से अनजान होकर संपर्क में आ गए।
कई संक्रमित कर्मचारियों के परिवारवाले भी संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इसी कंपनी के कर्मचारी के जरिए पड़ोस के जिले बुलंदशहर में भी कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी।
सीजफायर कंपनी नोएडा की इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद इसे 24 मार्च को अनिश्चितकाल के लिए सील कर दिया गया। यही नहीं, इस कंपनी से आए ढेरों मामलों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नाराजगी जाहिर की थी।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच प्रशासनिक लापरवाही की बात सामने आई तो योगी सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी। डीएम बीएन सिंह के बाद बुधवार को राज्य सरकार ने जिले के चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) अनुराग भार्गव को भी हटा दिया।
