[Ruby_E_Template slug="time-header"]
Jansandeshonline Hindi Latest NewsJansandeshonline Hindi Latest News
Font ResizerAa
  • World
  • Travel
  • Opinion
  • Science
  • Technology
  • Fashion
Search
  • Home
    • Home 1
    • Home 2
    • Home 3
    • Home 4
    • Home 5
  • Categories
    • Technology
    • Opinion
    • Travel
    • Fashion
    • World
    • Science
    • Health
  • Bookmarks
  • More Foxiz
    • Sitemap
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Home » Blog » उत्तराखंड आज हो गया 20 साल का
प्रदेश

उत्तराखंड आज हो गया 20 साल का

admin
Last updated: April 18, 2026 9:30 am
admin
Share
SHARE

[object Promise]

देहरादून। लीजिए, देखते-देखते अपना उत्तराखंड आज 20 साल का हो गया। इस दौरान एक अंतरिम और चार निर्वाचित सरकारों को देख चुका है सूबा। नौ नवंबर, 2000 को शुरुआत भाजपा से हुई, संयोगवश आज भी भाजपा ही राज कर रही है। सियासी सेहत के नजरिए से देखें तो मौजूदा त्रिवेंद्र सरकार अब तक की सबसे स्थिर सरकार साबित हुई है। नारायण दत्त तिवारी अब तक के नौ में से अकेले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया, ज्यादातर ढाई साल में ही निबट लिए। तिवारी के बाद अब त्रिवेंद्र ही पांच साल के कार्यकाल को पूरा करने की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि एक बड़ा अंतर यह है कि तिवारी को पांच साल में कई दफा अपनी पार्टी में गुटबाजी से जूझना पड़ा, त्रिवेंद्र साढ़े तीन साल से बगैर चुनौती नेतृत्व कर रहे हैं। अब 70 में से 57 सीटों पर काबिज हैं, इतना तो हक बनता ही है।

रास नहीं आ रही रीति-नीति

साल 2016 में कांग्रेस को झटका देकर 10 विधायकों ने भाजपा का दामन थामा था, लेकिन अब इनमें से ज्यादातर खुद को असहज पा रहे हैं। दिलचस्प यह कि भाजपा ने कमिटमेंट निभाते हुए इन्हें पूरा मान दिया, सभी को विधानसभा पहुंचने का रास्ता दिखाया, टिकट दिया। एक-दो को छोड़कर बाकी पहुंच भी गए। पांच मंत्री भी बने, लेकिन इन्हें रास नहीं आ रही भाजपा की रीति-नीति। दो कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री अलग-अलग कारणों से अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अब यह बात दीगर है कि सरकार और पार्टी संगठन ने इन्हें कोई तवज्जो नहीं दी। एक कैबिनेट मंत्री का तो आलम यह है कि इनके खिलाफ स्पेशल ऑडिट का आदेश दे दिया गया। हालांकि मंत्रीजी खासे दबंग हैं, लेकिन नियम-कायदे भी तो अपनी जगह हैं। एक अन्य मंत्री, अफसर से नहीं बनी तो मामला पुलिस तक जा पहुंचा। मुख्यमंत्री ने जांच बिठाई, तब जाकर पटाक्षेप हुआ।

सियासत नहीं, विवादों के चैंपियन

सियासत का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन। हरिद्वार जिले से विधायक हैं। निर्दलीय चुनाव जीते, कांग्रेस में गए, तो भी जीत हासिल की। चार साल पहले कांग्रेस का हाथ झटक कमल पकड़ा, तब भी चुनाव जीतने में कोई दिक्कत नहीं हुई। यह सब तो ठीक, मगर ये जनाब खुद विवादों को आमंत्रण देने का शौक पाल बैठे हैं। अकसर मूंछ पर ताव देते दिखते हैं। खिलाड़ी रहे हैं तो भिडऩा सामान्य सी बात। पिछले साल एक टिप्पणी ऐसे कर दी, जो सबको नागवार गुजरी। नतीजतन, पार्टी ने छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि एक साल में ही वापसी का टिकट भी थमा दिया। अब अपनी ही पार्टी के कार्यकत्र्ता को फोन पर कुछ ऐसे अंदाज में समझा रहे थे कि ऑडियो वायरल होते देर न लगी। वह तो समय पर बात समझ आ गई, माफी मांग विवाद खत्म करने की पहल कर दी।

क्या चलेगी सपा की साइकिल

विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, तो सियासी पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं। समाजवादी पार्टी ने भी नींद त्याग अपनी साइकिल की झाड़पोंछ शुरू कर दी। हाल ही में पार्टी ने प्रदेश संगठन की नई टीम का एलान किया, लेकिन इसकी पहली ही बैठक में जो बवाल हुआ, उससे साफ हो गया कि इनका कुछ नहीं होने वाला। दरअसल, सपा उत्तराखंड के अलग राज्य बनने से पहले अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय इस क्षेत्र में भी पैर जमा चुकी थी। कई पर्वतीय जिलों से सपा के विधायक चुने गए, मगर जैसे ही उत्तराखंड अलग राज्य बना, साइकिल की हवा ही निकल गई। चार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, मगर सपा एक भी सीट आज तक जीत नहीं पाई। यह स्थिति तब है, जब दो मैदानी जिलों, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में पार्टी का ठीकठाक वोट बैंक है। यह बात दीगर है कि इस पर अब बसपा कब्जा जमाकर बैठ गई है।

 

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article एक ही परिवार के सात लोगों की दो वाहनों के बीच टक्कर में मौत, पांच घायल
Next Article मनी दिवाली शेयर बाजार में, अबतक के शीर्ष स्‍तर पर Sensex और Nifty…

Recent Posts

  • खुशियों के बीच पसरा मातम: सोनपुर के होटल में बर्थडे पार्टी मना रहे युवक की संदिग्ध मौत, मां का रो-रोकर बुरा हाल
  • पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरण: आत्मनिर्भर भारत के लिए खतरा या अवसर?
  • बेलागवी दहशत: बच्चों का अपहरण और पुलिस का एनकाउंटर
  • ईरान-इस्राइल तनाव: क्या है अगला कदम?
  • आंध्र प्रदेश में स्व-सहायता समूहों का उल्लेखनीय सशक्तिकरण

Recent Comments

No comments to show.
[Ruby_E_Template slug="time-related"]
[Ruby_E_Template slug="time-footer"]
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?