BIHAR NEWS : प्रशांत किशोर पर भारी नीतीश की नाराजगी, जद(यू) में पड़े अकेले!

admin
By admin
3 Min Read

[object Promise]

पटना। जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यहां चल रही पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (पीके) और पूर्व राज्यसभा सांसद पवन कुमार वर्मा को दूर रखा गया है। इस बैठक में पीके की अनुपस्थिति को नीतीश कुमार की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस बैठक में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर विचार विमर्श किया जा रहा है। ऐसे में देश में चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बना चुके प्रशांत किशोर की इस बैठक से अनुपस्थिति कई सवाल खड़ा कर रही है।

पिछले करीब एक महीने में प्रशांत किशोर अपने ट्वीटर हैंडल से जिस तरह नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में मोर्चा खोल चुके हैं और भाजपा के नेताओं पर लगातार निशाना साध रहे हैं, उससे यह तय हो गया था कि पार्टी उनके पर कतरेगी। पीके ने इस दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह पर भी निशाना साधा। गौरतलब है कि दिल्ली में भाजपा और जद(यू) साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरी हैं, जबकि पीके आम आदमी पार्टी (आप) के रणनीतिकार की भूमिका निभा रहे हैं।

पार्टी प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने प्रशांत किशोर के बैठक में शामिल नहीं होने और पार्टी में उनकी जरूरत के सवाल पर कहा, “इस बैठक में संगठन सहित कई मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसमें पार्टी को उनकी कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा इस मुद्दे पर जद(यू) नेता अजय आलोक ने कहा, “प्रशांत किशोर और पवन कुमार वर्मा ‘कोरोना’ वायरस हैं, जिन्हें आइसोलेशन में रख दिया गया है।

[object Promise]

आलोक ने कहा, प्रशांत किशोर और पवन वर्मा पार्टी के किसी पद पर नहीं हैं। दोनों शायद अब जद(यू) के सदस्य भी नहीं हैं। जद(यू) को कॉर्पोरेट दलालों की कोई जरूरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार कई मामलों में इशारों-इशारों में प्रशांत किशोर के बयानों का खंडन तो कर देते हैं, लेकिन अब तक उन्होंने खुलकर कड़े शब्दों का प्रयोग नहीं किया है।

यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि नीतीश कुमार सीएए का विरोध करने वाले पूर्व सांसद पवन वर्मा को तो साफ संकेत दे रहे हैं, लेकिन प्रशांत किशोर को क्यों नहीं दे पा रहे हैं। पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार के करीबी समझे जाने वाले सांसद ललन सिंह हालांकि लगातार प्रशांत किशोर के बयानों का खंडन करते आ रहे हैं और जरूरत पड़ने पर प्रशांत किशोर की पार्टी में हैसियत भी बताते रहते हैं, मगर यह भी तय है कि जब तक नीतीश कुमार कुछ नहीं बोलते हैं, तब तक यह नहीं माना जा सकता कि प्रशांत किशोर की हैसियत जद(यू) में समाप्त हो गई है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *